दुर्गा अष्टमी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कन्या पूजन, व्रत नियम और माँ दुर्गा के 108 नाम
दुर्गा अष्टमी 2026 कब है? जानें 19 अक्टूबर की तारीख, अष्टमी तिथि, माँ महागौरी पूजा विधि, व्रत नियम, कन्या पूजन, पूजा सामग्री और महत्वपूर्ण FAQs।
अपडेट: 10 अक्टूबर 2026 | श्रेणी: हिंदू त्योहार, नवरात्रि, पूजा विधि
शारदीय नवरात्रि के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक दुर्गा अष्टमी 2026 सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन माँ दुर्गा के आठवें स्वरूप माँ महागौरी की पूजा की जाती है। भक्त व्रत रखते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं, कन्या पूजन करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए देवी माँ से प्रार्थना करते हैं।
दुर्गा अष्टमी को महाष्टमी भी कहा जाता है। यह पर्व शक्ति, साहस, पवित्रता और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में इस दिन विशेष दुर्गा पूजा, हवन, कन्या पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।
इस लेख में जानिए दुर्गा अष्टमी 2026 की तारीख, अष्टमी तिथि, पूजा का समय, पूजा सामग्री, पूजा विधि, व्रत के नियम, कन्या पूजन, माँ दुर्गा के नाम और इस पर्व से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों के जवाब।

दुर्गा अष्टमी 2026: मुख्य जानकारी एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पर्व का नाम | दुर्गा अष्टमी 2026, महाष्टमी |
| तारीख | सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 |
| पक्ष | आश्विन शुक्ल पक्ष |
| पूजनीय देवी | माँ महागौरी |
| नवरात्रि का दिन | नौवाँ दिन, प्रचलित शारदीय नवरात्रि गणना के अनुसार |
| प्रमुख अनुष्ठान | दुर्गा पूजा, व्रत, कन्या पूजन, हवन |
| अष्टमी तिथि आरंभ | 18 अक्टूबर 2026, सुबह लगभग 8:27 बजे |
| अष्टमी तिथि समाप्त | 19 अक्टूबर 2026, सुबह लगभग 10:51 बजे |
| अगला प्रमुख पर्व | विजयादशमी, 20 अक्टूबर 2026 |
स्रोत: मुंबई और दिल्ली के लिए उपलब्ध Drik Panchang विवरण। मुहूर्त स्थानीय पंचांग, परंपरा और पूजा के प्रकार के अनुसार जाँचें।
महत्वपूर्ण: आपके मूल लेख में अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर की रात से शुरू होने और 19 अक्टूबर की शाम तक रहने का समय दिया गया था। उपलब्ध पंचांग में इसके बजाय 18 अक्टूबर सुबह लगभग 8:27 बजे से 19 अक्टूबर सुबह लगभग 10:51 बजे तक का समय है। इसलिए प्रकाशित लेख में पुराने समय का इस्तेमाल न करें।
दुर्गा अष्टमी 2026 का शुभ मुहूर्त
दुर्गा अष्टमी पर पूजा का समय निर्धारित करने के लिए अष्टमी तिथि के साथ स्थानीय सूर्योदय और पूजा की परंपरा को भी ध्यान में रखा जाता है।
| धार्मिक कार्य | तारीख और समय |
|---|---|
| दुर्गा अष्टमी | 19 अक्टूबर 2026, सोमवार |
| अष्टमी तिथि प्रारंभ | 18 अक्टूबर, लगभग सुबह 8:27 बजे |
| अष्टमी तिथि समाप्त | 19 अक्टूबर, लगभग सुबह 10:51 बजे |
| कन्या पूजन | परिवार की परंपरा और स्थानीय मुहूर्त के अनुसार |
| दुर्गा पूजा एवं हवन | स्थानीय पंचांग में निर्धारित शुभ समय के अनुसार |
| विजयादशमी | 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार |
ये समय भारतीय मानक समय में प्रकाशित पंचांग विवरण पर आधारित हैं।
अष्टमी और नवमी का संयोग होने के कारण कन्या पूजन, हवन और व्रत पारण का समय अपनी परंपरा के अनुसार तय करें।
मुंबई, दिल्ली, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और अन्य शहरों में पूजा का व्यावहारिक मुहूर्त निर्धारित करने से पहले स्थानीय पंचांग देखना उचित है।
दुर्गा अष्टमी 2026 कब है: 18 या 19 अक्टूबर?
दुर्गा अष्टमी की तारीख को लेकर भ्रम इसलिए हो सकता है क्योंकि हिंदू पंचांग में तिथि आधी रात को नहीं, बल्कि चंद्रमा की स्थिति के अनुसार बदलती है।
2026 में उपलब्ध पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर की सुबह शुरू होकर 19 अक्टूबर की सुबह समाप्त होती है। 19 अक्टूबर को महाष्टमी और महा नवमी से संबंधित धार्मिक अनुष्ठान भी कुछ पंचांगों में एक ही दिन दर्शाए गए हैं।
इसलिए सामान्य शारदीय नवरात्रि संदर्भ में दुर्गा अष्टमी की तारीख 19 अक्टूबर 2026, सोमवार है। बंगाल की दुर्गा पूजा, क्षेत्रीय परंपराओं और विशेष संधि पूजा के समय में अंतर हो सकता है। अपने शहर के लिए स्थानीय पंचांग से पुष्टि अवश्य करें।
दुर्गा अष्टमी क्यों मनाई जाती है?
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी दुर्गा अधर्म और आसुरी शक्तियों के विनाश तथा धर्म की रक्षा का प्रतीक हैं। दुर्गा अष्टमी पर देवी की शक्ति, साहस और करुणा की आराधना की जाती है।
पौराणिक कथाओं में देवी के विभिन्न स्वरूपों द्वारा असुरों के संहार का वर्णन मिलता है। माँ चामुंडा का चंड और मुंड का वध करना भी देवी महात्म्य से जुड़ी प्रसिद्ध कथा है। इसी कारण महाष्टमी को शक्ति उपासना का विशेष दिन माना जाता है।
इस दिन भक्त:
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माँ दुर्गा और माँ महागौरी की पूजा करते हैं।
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दुर्गा सप्तशती, देवी कवच या दुर्गा चालीसा का पाठ करते हैं।
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उपवास रखते हैं और सात्विक भोजन करते हैं।
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कन्या पूजन और भोजन कराते हैं।
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परिवार की सुख-शांति के लिए हवन या अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
ये धार्मिक परंपराएँ श्रद्धा और क्षेत्रीय रीति-रिवाजों के अनुसार निभाई जाती हैं।
दुर्गा अष्टमी पर माँ महागौरी की पूजा का महत्व
नवदुर्गा के आठवें स्वरूप माँ महागौरी को पवित्रता, शांति, सौम्यता और करुणा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक चित्रण में उन्हें श्वेत वस्त्रों में, शांत स्वरूप में और वृषभ पर विराजमान दिखाया जाता है।
माँ महागौरी की पूजा के दौरान भक्त फूल, अक्षत, धूप, दीप, फल और मिठाई अर्पित करते हैं। कई परिवारों में सफेद मिठाई, नारियल या खीर का भोग लगाने की परंपरा भी है।
माँ महागौरी की आराधना का उद्देश्य मन की शुद्धि, सकारात्मक विचार, पारिवारिक सुख और आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रार्थना करना है।
दुर्गा अष्टमी पूजा सामग्री – Durga Ashtami Puja Samagri
पूजा से पहले सामग्री तैयार रखने से अनुष्ठान व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है।
| पूजा सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| माँ दुर्गा या महागौरी की तस्वीर | पूजा के लिए |
| लाल या सफेद वस्त्र | चौकी और देवी के श्रृंगार के लिए |
| लाल चुनरी | देवी को अर्पित करने के लिए |
| रोली, कुमकुम और हल्दी | तिलक एवं पूजा के लिए |
| अक्षत यानी साबुत चावल | पूजा में अर्पित करने के लिए |
| ताजे फूल और माला | देवी को अर्पित करने के लिए |
| दीपक, घी या तेल | दीप प्रज्वलित करने के लिए |
| धूप या अगरबत्ती | पूजा के लिए |
| कलावा या मौली | धार्मिक अनुष्ठान के लिए |
| नारियल, पान और सुपारी | परंपरा के अनुसार अर्पण |
| फल और मिठाई | भोग के लिए |
| लौंग और इलायची | पूजा एवं प्रसाद के लिए |
| कपूर | आरती के लिए |
| पंचामृत | अभिषेक या भोग के लिए, परंपरा अनुसार |
| आसन, थाली और जल का पात्र | पूजा की व्यवस्था के लिए |
| कन्या पूजन की सामग्री | भोजन, फल, दक्षिणा या उपहार |
सामग्री की मात्रा और प्रकार परिवार की परंपरा, पूजा पद्धति और पुरोहित के निर्देशों के अनुसार बदल सकते हैं।
दुर्गा अष्टमी की पूजा विधि – Durga Ashtami Puja Vidhi
दुर्गा अष्टमी पर घर में सरल तरीके से माँ दुर्गा की पूजा की जा सकती है। यदि आप विस्तृत वैदिक पूजा, दुर्गा सप्तशती पाठ या हवन कराना चाहते हैं, तो योग्य पुरोहित से विधि और मुहूर्त की जानकारी लें।
1. सुबह स्नान और पूजा स्थल की तैयारी
प्रातः स्नान करके साफ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल को स्वच्छ करें और चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर माँ दुर्गा या महागौरी की तस्वीर स्थापित करें।
2. संकल्प लें
हाथ में जल और पुष्प लेकर अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा का संकल्प लें। परिवार की सुख-शांति और कल्याण के लिए प्रार्थना करें।
3. दीपक जलाकर देवी का पूजन करें
दीपक प्रज्वलित करें और देवी को रोली, अक्षत, फूल, चुनरी तथा अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें। अग्नि और दीपक का प्रयोग सुरक्षित स्थान पर करें।
4. माँ महागौरी के मंत्र का जाप करें
माँ महागौरी की आराधना के लिए इस मंत्र का जाप किया जा सकता है:
मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः।
मंत्र का जाप अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 108 बार किया जा सकता है। संख्या अनिवार्य नहीं है।
5. भोग अर्पित करें
देवी को फल, नारियल, मिठाई या परिवार की परंपरा के अनुसार सात्विक भोग अर्पित करें। भोग लगाने के बाद प्रसाद परिवार में बाँटें।
6. दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें
समय और परंपरा के अनुसार दुर्गा चालीसा, देवी स्तुति या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। संपूर्ण पाठ करने की इच्छा हो तो पाठ की विधि और नियम पहले समझ लें।
7. माँ दुर्गा की आरती करें
परिवार के सदस्यों के साथ आरती करें और अंत में देवी से सुख, शांति और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।
8. कन्या पूजन करें
परिवार की परंपरा के अनुसार कन्याओं को आमंत्रित करें, उनके पैर धोने की परंपरा हो तो सम्मानपूर्वक निभाएँ, तिलक लगाएँ और भोजन कराएँ। अंत में अपनी क्षमता के अनुसार दक्षिणा या उपहार दें।
9. व्रत पारण करें
व्रत खोलने का समय परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्धारित करें। यदि अष्टमी और नवमी का संयोग हो, तो पारण का समय विशेष रूप से जाँचें।
दुर्गा अष्टमी व्रत के नियम
दुर्गा अष्टमी का व्रत श्रद्धा, संयम और आत्मानुशासन के साथ रखा जाता है। सभी लोगों के लिए एक ही प्रकार का उपवास आवश्यक नहीं है।
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व्रत रखने से पहले अपनी सेहत और क्षमता का ध्यान रखें।
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फलाहार, जल या सात्विक भोजन का चुनाव अपनी परंपरा के अनुसार करें।
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पूजा स्थल को साफ रखें और धार्मिक गतिविधियों के दौरान संयम बनाए रखें।
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दुर्गा चालीसा, देवी मंत्र या स्तुति का पाठ कर सकते हैं।
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व्रत के दौरान जरूरतमंद लोगों को भोजन या अन्य सहायता देना शुभ धार्मिक परंपरा माना जाता है।
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व्रत समाप्त करने का समय स्थानीय पंचांग और पारिवारिक रीति के अनुसार तय करें।
गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और किसी बीमारी के कारण विशेष आहार लेने वाले लोगों को कठोर उपवास रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। धार्मिक आस्था के लिए स्वास्थ्य को जोखिम में डालना आवश्यक नहीं है।
दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन कैसे करें?
कन्या पूजन, जिसे कंजक पूजा भी कहा जाता है, उत्तर भारत में दुर्गा अष्टमी और महानवमी की प्रमुख परंपराओं में से एक है। इसमें छोटी कन्याओं को देवी के स्वरूप के रूप में सम्मान दिया जाता है।
कन्या पूजन की सामान्य विधि
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पूजा के लिए स्वच्छ और आरामदायक स्थान तैयार करें।
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कन्याओं का सम्मानपूर्वक स्वागत करें।
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परिवार की परंपरा के अनुसार तिलक लगाएँ और पुष्प अर्पित करें।
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हलवा, पूरी, चने या अन्य सात्विक भोजन परोसें।
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भोजन के बाद फल, दक्षिणा या छोटा उपहार दें।
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कन्याओं को सम्मानपूर्वक विदा करें।
कई परिवार कन्याओं के साथ एक बालक को भी आमंत्रित करते हैं, जिसे भैरव स्वरूप माना जाता है। यह प्रथा सभी क्षेत्रों में अनिवार्य नहीं है।
कन्याओं की संख्या, उनकी आयु और पूजन की विधि में क्षेत्रीय अंतर मिलते हैं। बच्चों की गरिमा, स्वच्छता, सुरक्षा और सहमति का सम्मान करना आवश्यक है।
दुर्गा अष्टमी और महानवमी में क्या अंतर है?
| आधार | दुर्गा अष्टमी | महानवमी |
|---|---|---|
| तिथि | आश्विन शुक्ल अष्टमी | आश्विन शुक्ल नवमी |
| देवी उपासना | माँ महागौरी की पूजा प्रमुख | माँ सिद्धिदात्री की पूजा प्रमुख |
| प्रमुख परंपराएँ | दुर्गा पूजा, कन्या पूजन, हवन | नवमी पूजा, हवन, कन्या पूजन |
| क्षेत्रीय अंतर | महाष्टमी के विशेष अनुष्ठान | नवमी के विशेष अनुष्ठान |
| 2026 में | 19 अक्टूबर | कुछ पंचांगों में 19 अक्टूबर को ही नवमी के अनुष्ठान भी |
2026 में अष्टमी और नवमी की तिथियाँ एक ही नागरिक दिन पर पड़ने के कारण कुछ परंपराओं में दोनों पर्वों के अनुष्ठान 19 अक्टूबर को होंगे। इसलिए कन्या पूजन और हवन का समय स्थानीय पंचांग से निर्धारित करना चाहिए।
दुर्गा अष्टमी के शुभ अवसर पर माँ दुर्गा के 108 नाम और उनके अर्थ
माँ दुर्गा के नामों का स्मरण देवी की शक्ति, करुणा, साहस और मातृत्व का ध्यान करने का एक पारंपरिक तरीका है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इन नामों का जाप पूजा, ध्यान या आरती से पहले कर सकते हैं।
आपके मूल लेख में 107 नाम दिए गए हैं, इसलिए उस सूची को बिना सुधार के “108 नाम” के रूप में प्रकाशित करना उचित नहीं होगा। नीचे देवी के 108 नामों की सूची के लिए एक संपादकीय रूप से व्यवस्थित प्रारूप दिया गया है। प्रत्येक नाम का प्रचलित अर्थ अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में थोड़ा भिन्न हो सकता है।
| क्रम | माँ दुर्गा का नाम | सामान्य अर्थ |
|---|---|---|
| 1 | सती | सत्य और निष्ठा का प्रतीक |
| 2 | साध्वी | सदाचार का पालन करने वाली |
| 3 | भवप्रीता | भगवान शिव की प्रिय |
| 4 | भवानी | जगत की माता |
| 5 | भवमोचनी | सांसारिक बंधनों से मुक्ति देने वाली |
| 6 | आर्या | श्रेष्ठ और पूजनीय |
| 7 | दुर्गा | कठिनाइयों से रक्षा करने वाली |
| 8 | जया | विजय प्रदान करने वाली |
| 9 | आद्या | आदि शक्ति |
| 10 | त्रिनेत्रा | तीन नेत्रों वाली |
| 11 | शूलधारिणी | त्रिशूल धारण करने वाली |
| 12 | पिनाकधारिणी | पिनाक से संबंधित दिव्य शक्ति |
| 13 | चित्रा | अद्भुत और सुंदर स्वरूप वाली |
| 14 | चंडघंटा | घंटा धारण करने वाली देवी |
| 15 | महातपा | महान तपस्या करने वाली |
| 16 | मनःस्वरूपिणी | मन और चेतना से संबंधित शक्ति |
| 17 | बुद्धिदा | बुद्धि देने वाली |
| 18 | अहंकारा | अहंकार के सिद्धांत से संबंधित नाम |
| 19 | चित्तरूपा | चेतना का स्वरूप |
| 20 | चिता | अग्नि और अंतिम संस्कार से संबंधित नाम |
| 21 | चिति | शुद्ध चेतना |
| 22 | सर्वमन्त्रमयी | सभी मंत्रों में व्याप्त शक्ति |
| 23 | सत्ता | अस्तित्व का स्वरूप |
| 24 | सत्यानंदस्वरूपिणी | सत्य और आनंद का स्वरूप |
| 25 | अनन्ता | जिसकी कोई सीमा नहीं |
| 26 | भाविनी | सृजन और भाव की शक्ति |
| 27 | भाव्या | ध्यान और उपासना के योग्य |
| 28 | भव्या | मंगलमय और दिव्य |
| 29 | अभव्या | अद्वितीय और अलौकिक |
| 30 | सदागति | कल्याणकारी गति प्रदान करने वाली |
| 31 | शाम्भवी | भगवान शंभु से संबंधित देवी |
| 32 | देवमाता | देवताओं की माता |
| 33 | चिन्ता | चिंतन से संबंधित नाम |
| 34 | रत्नप्रिया | रत्नों से प्रियता रखने वाली |
| 35 | सर्वविद्या | समस्त ज्ञान की अधिष्ठात्री |
| 36 | दक्षकन्या | दक्ष प्रजापति की पुत्री |
| 37 | दक्षयज्ञविनाशिनी | दक्ष यज्ञ के विनाश से संबंधित शक्ति |
| 38 | अपर्णा | कठोर तपस्या करने वाली देवी |
| 39 | अनेकवर्णा | अनेक रंगों वाली |
| 40 | पाटला | लालिमा से युक्त स्वरूप |
| 41 | पाटलावती | लालिमा और सौंदर्य से संबंधित नाम |
| 42 | पट्टाम्बरपरिधाना | रेशमी वस्त्र धारण करने वाली |
| 43 | कलामंजीररंजिनी | नूपुरों से सुशोभित |
| 44 | अमेय | जिसकी माप संभव नहीं |
| 45 | विक्रमा | पराक्रम से युक्त |
| 46 | क्रूरा | दुष्ट शक्तियों के प्रति कठोर |
| 47 | सुंदरी | सुंदर स्वरूप वाली |
| 48 | सुरसुंदरी | दिव्य सौंदर्य वाली |
| 49 | वनदुर्गा | वन की रक्षिका देवी |
| 50 | मातंगी | मातंगी देवी का स्वरूप |
| 51 | मातंगमुनिपूजिता | ऋषि मातंग द्वारा पूजित |
| 52 | ब्राह्मी | ब्रह्मा की शक्ति |
| 53 | माहेश्वरी | महेश्वर की शक्ति |
| 54 | ऐन्द्री | इंद्र की शक्ति |
| 55 | कौमारी | कुमार कार्तिकेय की शक्ति |
| 56 | वैष्णवी | विष्णु की शक्ति |
| 57 | चामुंडा | चंड और मुंड का संहार करने वाली |
| 58 | वाराही | वराह से संबंधित शक्ति |
| 59 | लक्ष्मी | समृद्धि और सौभाग्य की देवी |
| 60 | पुरुषाकृति | पुरुष रूप धारण करने वाली शक्ति |
| 61 | विमलोत्कर्षिणी | निर्मलता और उत्कर्ष से संबंधित नाम |
| 62 | ज्ञाना | ज्ञान का स्वरूप |
| 63 | क्रिया | कर्म और क्रियाशीलता की शक्ति |
| 64 | नित्या | शाश्वत |
| 65 | बुद्धिदा | बुद्धि प्रदान करने वाली |
| 66 | बहुला | अनेक रूपों वाली |
| 67 | बहुलप्रेमा | व्यापक प्रेम का स्वरूप |
| 68 | सर्ववाहनवाहना | अनेक दिव्य वाहनों से संबंधित देवी |
| 69 | निशुंभशुंभहननी | शुंभ और निशुंभ का संहार करने वाली |
| 70 | महिषासुरमर्दिनी | महिषासुर का वध करने वाली |
| 71 | मधुकैटभहंत्री | मधु और कैटभ का संहार करने वाली |
| 72 | चंडमुंडविनाशिनी | चंड और मुंड का विनाश करने वाली |
| 73 | सर्वासुरविनाशा | सभी असुरों का विनाश करने वाली |
| 74 | सर्वदानवघातिनी | दानवों का संहार करने वाली |
| 75 | सर्वशास्त्रमयी | शास्त्रों में व्याप्त शक्ति |
| 76 | सत्या | सत्य स्वरूपा |
| 77 | सर्वास्त्रधारिणी | दिव्य अस्त्र धारण करने वाली |
| 78 | अनेकशस्त्रहस्ता | अनेक शस्त्र धारण करने वाली |
| 79 | अनेकास्त्रधारिणी | अनेक अस्त्रों से युक्त |
| 80 | कुमारी | कन्या स्वरूपा |
| 81 | एककन्या | एकमात्र कन्या स्वरूप |
| 82 | कैशोरी | किशोर अवस्था से संबंधित नाम |
| 83 | युवती | युवा स्वरूपा |
| 84 | यति | तप और संयम का प्रतीक |
| 85 | अप्रौढ़ा | अपरिपक्व अवस्था से संबंधित नाम |
| 86 | प्रौढ़ा | परिपक्व स्वरूप |
| 87 | वृद्धमाता | मातृशक्ति का वृद्ध स्वरूप |
| 88 | बलप्रदा | बल प्रदान करने वाली |
| 89 | महोदरी | विशाल उदर वाली, ब्रह्मांड को धारण करने वाली |
| 90 | मुक्तकेशी | खुले केशों वाली |
| 91 | घोररूपा | उग्र स्वरूप वाली |
| 92 | महाबला | अपार शक्ति वाली |
| 93 | अग्निज्वाला | अग्नि के समान तेजस्वी |
| 94 | रौद्रमुखी | उग्र और रौद्र स्वरूप वाली |
| 95 | कालरात्रि | अंधकार और भय का नाश करने वाली |
| 96 | तपस्विनी | तपस्या में लीन |
| 97 | नारायणी | नारायण की शक्ति |
| 98 | भद्रकाली | कल्याणकारी काली स्वरूप |
| 99 | विष्णुमाया | विष्णु की दिव्य माया |
| 100 | शिवदूती | शिव की दूत स्वरूप शक्ति |
| 101 | कराली | उग्र स्वरूप वाली |
| 102 | अनन्ता | अनंत और असीम |
| 103 | परमेश्वरी | सर्वोच्च देवी |
| 104 | कात्यायनी | ऋषि कात्यायन से संबंधित देवी |
| 105 | सावित्री | दिव्य तेज से संबंधित देवी |
| 106 | प्रत्यक्षा | प्रत्यक्ष स्वरूप में अनुभव की जाने वाली |
| 107 | ब्रह्मवादिनी | ब्रह्मज्ञान का प्रतिपादन करने वाली |
संपादकीय नोट: यह आपके मूल पाठ की संशोधित 107-नाम सूची है, 108 नामों की प्रमाणित संपूर्ण स्तोत्र-सूची नहीं। इसे प्रकाशित करते समय “माँ दुर्गा के 108 नाम” शीर्षक के अंतर्गत पूर्ण बताने से बचें, जब तक किसी प्रामाणिक देवी स्तोत्र से शेष नाम और वर्तनी सत्यापित न कर ली जाए।
दुर्गा अष्टमी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
दुर्गा अष्टमी केवल पूजा और व्रत का दिन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम और सेवा का अवसर भी है। भक्त इस दिन देवी से शक्ति, विवेक और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।
1. शक्ति की उपासना
माँ दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनकी पूजा व्यक्ति को साहस, आत्मविश्वास और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
2. कन्या पूजन और नारी सम्मान
कन्या पूजन के माध्यम से बालिकाओं को देवी स्वरूप मानकर सम्मान देने की परंपरा निभाई जाती है। इस अवसर पर बच्चों को भोजन कराने के साथ उनका सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है।
3. व्रत, ध्यान और आत्मसंयम
व्रत रखने वाले भक्त अपनी दिनचर्या में संयम रखते हैं और मंत्र जाप, ध्यान तथा पूजा में समय बिताते हैं। व्रत का स्वरूप व्यक्ति की क्षमता और धार्मिक परंपरा के अनुसार होना चाहिए।
4. परिवार और समाज के कल्याण की प्रार्थना
कई परिवार दुर्गा अष्टमी पर हवन, दान और सामूहिक पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन कार्यों का उद्देश्य कल्याण, सद्भाव और सेवा की भावना को बढ़ावा देना है।
दुर्गा अष्टमी 2026 पर पूजा के लिए पंडित कैसे बुक करें?
यदि आप घर, सोसाइटी, मंदिर या किसी अन्य स्थान पर दुर्गा अष्टमी पूजा, दुर्गा सप्तशती पाठ, हवन या कन्या पूजन से संबंधित विशेष अनुष्ठान करवाना चाहते हैं, तो पहले पूजा की विधि, स्थान, तारीख और आवश्यक सामग्री तय कर लें।
Panditji On Way के माध्यम से आप अपने शहर और आवश्यकता के अनुसार पंडित जी की उपलब्धता के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
पूजा की बुकिंग या जानकारी के लिए Panditji On Way की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ। अन्य संबंधित सेवाओं के लिए दुर्गा पूजा सेवा और रुद्राभिषेक पूजा के पेज भी देख सकते हैं।
बुकिंग से पहले ये बातें स्पष्ट करें:
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पूजा का प्रकार और आवश्यक विधि।
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पूजा की तारीख और स्थानीय मुहूर्त।
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पूजा का स्थान और पंडित जी की उपलब्धता।
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पूजा सामग्री कौन उपलब्ध कराएगा।
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पाठ, हवन, दक्षिणा और अन्य सेवाओं की लागत।
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पूजा की अवधि और आवश्यक तैयारी।
किसी भी सेवा की उपलब्धता, कीमत या बुकिंग की पुष्टि सीधे प्रदाता से करें।
दुर्गा अष्टमी 2026: शहर के अनुसार पूजा और पंडित सेवा
दुर्गा अष्टमी पर पूजा का आयोजन घर, मंदिर, अपार्टमेंट या सामुदायिक पूजा स्थल पर किया जा सकता है। यदि आप स्थानीय स्तर पर पंडित सेवा तलाश रहे हैं, तो अपने शहर का नाम और पूजा का प्रकार स्पष्ट रूप से बताना उपयोगी रहेगा।
| शहर या क्षेत्र | स्थानीय Durga Puja Pandit |
|---|---|
| मुंबई, महाराष्ट्र | Durga Ashtami Puja Pandit in Mumbai |
| पुणे, महाराष्ट्र | Durga Ashtami Puja in Pune |
| दिल्ली NCR | Durga Ashtami Puja Pandit in Delhi NCR |
| बेंगलुरु, कर्नाटक | Navratri Puja Services in Bangalore |
| हैदराबाद, तेलंगाना | Durga Puja Pandit in Hyderabad |
| चेन्नई, तमिलनाडु | Navratri Puja Services in Chennai |
| अहमदाबाद, गुजरात | Durga Ashtami Puja in Ahmedabad |
| जयपुर, राजस्थान | Durga Ashtami Pandit in Jaipur |
| नोएडा, उत्तर प्रदेश | Durga Ashtami Puja in Noida |
| गुरुग्राम, हरियाणा | Navratri Puja Pandit in Gurgaon |
दुर्गा अष्टमी 2026 से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. दुर्गा अष्टमी 2026 कब है?
दुर्गा अष्टमी 2026 सोमवार, 19 अक्टूबर को है। उपलब्ध पंचांगों के अनुसार इस दिन महाष्टमी और माँ महागौरी की पूजा की जाएगी।
2. दुर्गा अष्टमी 2026 की अष्टमी तिथि कब शुरू होगी?
मुंबई और दिल्ली के लिए उपलब्ध Drik Panchang विवरण के अनुसार अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर 2026 को सुबह लगभग 8:27 बजे शुरू होगी। स्थानीय पूजा मुहूर्त के लिए अपने शहर का पंचांग देखें।
3. दुर्गा अष्टमी 2026 की तिथि कब समाप्त होगी?
उपलब्ध पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर 2026 को सुबह लगभग 10:51 बजे समाप्त होगी। तिथि समाप्त होने के बाद नवमी तिथि शुरू होगी।
4. दुर्गा अष्टमी पर किस देवी की पूजा की जाती है?
नवदुर्गा परंपरा के अनुसार दुर्गा अष्टमी पर माँ दुर्गा के आठवें स्वरूप माँ महागौरी की पूजा की जाती है। उन्हें शांति, पवित्रता और करुणा का प्रतीक माना जाता है।
5. दुर्गा अष्टमी को महाष्टमी क्यों कहा जाता है?
आश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को नवरात्रि की महाष्टमी कहा जाता है। इस दिन दुर्गा पूजा, देवी स्तुति, हवन और कन्या पूजन जैसी परंपराएँ निभाई जाती हैं।
6. क्या दुर्गा अष्टमी और महानवमी 2026 एक ही दिन हैं?
कुछ पंचांगों में 19 अक्टूबर को महाष्टमी और महानवमी से जुड़े अनुष्ठान एक ही नागरिक दिन पर पड़ते हैं। दोनों तिथियों के अलग-अलग समय और क्षेत्रीय पूजा परंपराओं को ध्यान में रखना चाहिए।
7. दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन कब करना चाहिए?
कन्या पूजन अष्टमी या नवमी के दिन परिवार की धार्मिक परंपरा के अनुसार किया जाता है। 2026 में तिथियों के संयोग के कारण स्थानीय पंचांग और पूजा की विधि के आधार पर समय निर्धारित करना बेहतर है।
8. दुर्गा अष्टमी की पूजा में कौन-सी सामग्री चाहिए?
मुख्य सामग्री में देवी की तस्वीर, चुनरी, फूल, रोली, कुमकुम, अक्षत, दीपक, घी या तेल, धूप, नारियल, फल, मिठाई और कपूर शामिल हैं। विस्तृत पूजा या हवन के लिए अतिरिक्त सामग्री की आवश्यकता हो सकती है।
9. दुर्गा अष्टमी का व्रत कैसे रखा जाता है?
भक्त अपनी परंपरा के अनुसार निर्जल व्रत, फलाहार या सात्विक भोजन के साथ व्रत रखते हैं। स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार उपवास चुनना चाहिए और पारण का समय स्थानीय पंचांग से देखना चाहिए।
10. दुर्गा अष्टमी पर कौन-सा मंत्र पढ़ना चाहिए?
माँ महागौरी की पूजा में “ॐ देवी महागौर्यै नमः” मंत्र का जाप किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त भक्त दुर्गा चालीसा, देवी स्तुति या दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कर सकते हैं।
11. दुर्गा अष्टमी पर कौन-सा भोग लगाया जाता है?
परिवार की परंपरा के अनुसार फल, नारियल, मिठाई, खीर या अन्य सात्विक व्यंजन अर्पित किए जा सकते हैं। कन्या पूजन में कई स्थानों पर हलवा, पूरी और चने का भोजन कराया जाता है।
12. दुर्गा अष्टमी और दशहरा 2026 की तारीख क्या है?
दुर्गा अष्टमी 19 अक्टूबर 2026 को और विजयादशमी यानी दशहरा 20 अक्टूबर 2026 को है।
13. क्या घर पर दुर्गा अष्टमी पूजा की जा सकती है?
हाँ। घर में स्वच्छ पूजा स्थल तैयार करके माँ दुर्गा या महागौरी की तस्वीर स्थापित करें, दीपक जलाएँ, पुष्प और भोग अर्पित करें तथा मंत्र या स्तुति का पाठ करें। विस्तृत अनुष्ठान के लिए योग्य पुरोहित की सहायता ली जा सकती है।
14. दुर्गा अष्टमी के लिए पंडित जी कैसे बुक करें?
आप Panditji On Way की वेबसाइट पर जाकर संबंधित पूजा सेवा की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। बुकिंग से पहले अपने शहर, पूजा के प्रकार, तारीख, उपलब्धता और शुल्क की पुष्टि करें।
15. दुर्गा अष्टमी 2026 का धार्मिक महत्व क्या है?
दुर्गा अष्टमी शक्ति की उपासना, बुराई पर अच्छाई की विजय, आत्मसंयम और सेवा की भावना से जुड़ा पर्व है। भक्त इस दिन देवी की पूजा, व्रत, मंत्र जाप, कन्या पूजन और दान के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
निष्कर्ष
दुर्गा अष्टमी 2026 माँ दुर्गा के आठवें स्वरूप माँ महागौरी की आराधना का महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन भक्त पूजा, व्रत, मंत्र जाप, कन्या पूजन और हवन जैसी धार्मिक परंपराओं के माध्यम से देवी का स्मरण करते हैं।
इस वर्ष दुर्गा अष्टमी 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। अष्टमी और नवमी के तिथि-संयोग के कारण पूजा, कन्या पूजन और व्रत पारण का सही समय निर्धारित करने के लिए स्थानीय पंचांग की सहायता लें।
यदि आप घर या सामुदायिक स्थल पर दुर्गा अष्टमी पूजा आयोजित करना चाहते हैं, तो Panditji On Way पर संबंधित पूजा सेवाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। श्रद्धा, स्वच्छता और अपनी पारिवारिक परंपराओं के अनुसार पूजा करें।
