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आरती कीजै हनुमान लला की – Shree Hanuman Ji Ki Aarti

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आरती कीजै हनुमान लला की – सम्पूर्ण आरती, महत्व और लाभ (Shree Hanuman Ji Ki Aarti)

“आरती कीजै हनुमान लला की” एक अत्यंत शक्तिशाली और लोकप्रिय आरती है, जो भक्तों को हनुमान जी की कृपा प्राप्त कराने में सहायक है। यह ब्लॉग न केवल आरती के सम्पूर्ण बोल प्रस्तुत करता है, बल्कि हनुमान जी की भक्ति, आरती के लाभ, विधि और उससे जुड़ी पौराणिक कथाओं को भी विस्तार से समझाता है।

हनुमान जी को संकट मोचन, अष्टसिद्धि और नव निधियों के दाता के रूप में जाना जाता है। मंगलवार और शनिवार के दिन विशेष रूप से हनुमान जी की पूजा की जाती है। हनुमान जी की आरती “आरती कीजै हनुमान लला की” भक्तों के बीच बहुत प्रसिद्ध है। इस आरती का पाठ करने से भय, रोग, शत्रु बाधा और ग्रहदोष समाप्त होते हैं। आइए जानते हैं इस आरती के शब्द, उसका महत्व और लाभ विस्तार से।

आरती कीजै हनुमान लला की

आरती कीजै हनुमान लला की – सम्पूर्ण आरती

॥ श्री हनुमंत स्तुति ॥

मनोजवं मारुत तुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं, बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥
वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं,
श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥

आरती की जय हनुमान लाला की
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।

जाके बल से गिरवर काँपे,
रोग-दोष जाके निकट न झाँके।

अंजनि पुत्र महाबलदायी,
संतन के प्रभु सदा सहाई।

आरती कीजै हनुमान लला की ॥

दे वीरा रघुनाथ पठाए ।
लंका जारि सिया सुधि लाये ॥

लंका सो कोट समुद्र सी खाई ।
जात पवनसुत बार न लाई ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ॥

लंका जारि असुर संहारे,
सिया रामजी के काज संवारे।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे,
लाये संजिवन प्राण उबारे ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ॥

पैठ पताल तोरि जमकारे,
अहिरावण की भुजा उखारे।

बाएं भुजा असुर दल मारे,
दाहिने भुजा संतजन तारे।

आरती कीजै हनुमान लला की ॥

सुर-नर-मुनि जन आरती उतरें ।
जय जय जय हनुमान उचारें ॥
कंचन थार कपूर लौ छाई ।
आरती करत अंजना माई ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ॥

जो हनुमानजी की आरती गावे ।
बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥
लंक विध्वंस किये रघुराई ।
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

॥ इति संपूर्णंम् ॥


आरती कीजै हनुमान लला की – पौराणिक कथा का संक्षिप्त उल्लेख

हनुमान जी का जन्म त्रेतायुग में अंजनी माता और केसरी के घर हुआ था। वे स्वयं भगवान शिव के रुद्रावतार माने जाते हैं। बाल्यकाल में उन्होंने सूर्य को फल समझकर निगल लिया था, जिससे संपूर्ण सृष्टि में अंधकार छा गया था। तब इंद्र के वज्र से घायल होने के बाद देवताओं ने उन्हें अनेकों वरदान दिए, जिनमें बल, बुद्धि, विद्या और अमरता प्रमुख थे।

हनुमान जी ने श्रीराम की सेवा में अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। “आरती की जय हनुमान लाला की” में उनके इन्हीं कार्यों — जैसे लंका दहन, सीता माता की खोज, लक्ष्मण को संजीवनी लाना, और अहिरावण का वध — का उल्लेख होता है।


साधना विधि: आरती करने का सही तरीका

हनुमान जी की आरती करते समय निम्न विधि को अपनाना शुभ माना जाता है:

  1. स्थान की पवित्रता: पूजा स्थल स्वच्छ और शांत होना चाहिए।
  2. दीपक जलाना: तिल के तेल या घी का दीपक जलाएं।
  3. लाल पुष्प अर्पण करें: लाल फूल हनुमान जी को प्रिय हैं।
  4. गाय का घी या कपूर से आरती करें।
  5. आरती के बाद हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें।
  6. प्रसाद में गुड़, चना, या बूंदी चढ़ाएं।

आरती के पीछे की आध्यात्मिक ऊर्जा

हनुमान जी की आरती केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह एक ध्वनि-आधारित साधना है। जब आरती को श्रद्धा से गाया जाता है, तो यह:

शास्त्रों में कहा गया है:

“जहाँ आरती होती है, वहाँ दैवीय ऊर्जा स्वयं निवास करती है।”


हनुमान जी और रामभक्ति का अनोखा सम्बन्ध

हनुमान जी के लिए रामभक्ति ही सब कुछ है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में लिखा:

“रामकाज कीन्हे बिनु मोहि कहाँ विश्राम।”

अर्थात् हनुमान जी को तब तक चैन नहीं जब तक वे प्रभु श्रीराम का कार्य न कर लें। यही समर्पण भाव इस आरती में भी झलकता है।


हनुमान जी के अन्य प्रसिद्ध स्तुति व भजन

यदि आप हनुमान जी की भक्ति को और गहराई देना चाहते हैं, तो निम्न भजनों और स्तुति का पाठ भी लाभकारी होता है:

इन पाठों के साथ यदि आप आरती का गान करते हैं, तो आध्यात्मिक लाभ कई गुना बढ़ जाता है।


हनुमान जी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

  1. हनुमान जी चिरंजीवी हैं – अर्थात वे आज भी जीवित हैं।
  2. वे एकमात्र ऐसे देवता हैं जिन्हें शिव, राम और शक्ति तीनों का आशीर्वाद प्राप्त है।
  3. हनुमान जी का नाम लेने मात्र से भूत-प्रेत और शनि दोष दूर हो जाते हैं।

हनुमान जी की आरती का महत्व

हनुमान जी की आरती न केवल धार्मिक अनुष्ठानों में गाई जाती है, बल्कि यह मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक कल्याण का माध्यम भी बनती है। इस आरती में हनुमान जी के साहस, बल, सेवा भाव और भक्ति की महिमा का वर्णन है।

मुख्य लाभ:


आरती कब और कैसे करें?

  1. मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाकर आरती करें।
  2. चंदन, फूल, और गुड़ चढ़ाएं।
  3. आरती के अंत में हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें।

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अगर आप घर पर विधिपूर्वक हनुमान जी की आरती करवाना चाहते हैं, तो अब बुकिंग करें पंडितजी ऑन वे के माध्यम से। भारत के प्रमुख शहरों में अनुभवी ब्राह्मणों द्वारा संपूर्ण विधि से पूजा और आरती की जाती है।

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Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. हनुमान जी की आरती “आरती कीजै हनुमान लला की” किस दिन करनी चाहिए?

उत्तर: “आरती कीजै हनुमान लला की” मंगलवार और शनिवार को करने से विशेष फल मिलता है। ये दिन हनुमान जी को समर्पित माने जाते हैं और इस दिन आरती करने से नकारात्मक ऊर्जा और शत्रु बाधाएं दूर होती हैं।


Q2. आरती कीजै हनुमान लला की करने से क्या लाभ होता है?

उत्तर: इस आरती से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है। यह रोगों, भय, दरिद्रता, शनि दोष और बुरी शक्तियों को समाप्त करने में सहायक है। इसके नियमित पाठ से आत्मबल, विजय और मानसिक शांति प्राप्त होती है।


Q3. क्या “आरती कीजै हनुमान लला की” का पाठ घर पर कर सकते हैं?

उत्तर: जी हां, आप इस आरती को घर, मंदिर या किसी भी पवित्र स्थान पर कर सकते हैं। इसे करते समय हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीप जलाना और श्रद्धा रखना आवश्यक है।


Q4. “आरती कीजै हनुमान लला की” के साथ कौन-कौन से पाठ करें?

उत्तर: हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड के पाठ इस आरती के साथ करने से विशेष फल मिलता है। इससे भक्ति का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है और जीवन में संतुलन आता है।


Q5. हनुमान आरती के लिए कौन सा समय सबसे शुभ होता है?

उत्तर: संध्या समय (शाम को सूर्यास्त के बाद) और ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे के बीच) को आरती करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह समय आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए उत्तम होता है।


Q6. क्या हनुमान जी की आरती से शनि दोष भी शांत होता है?

उत्तर: हां, हनुमान जी को शनि देव का कष्ट निवारक माना जाता है। जो व्यक्ति “आरती कीजै हनुमान लला की” और हनुमान चालीसा का पाठ करता है, उसके जीवन से शनि दोष धीरे-धीरे शांत हो जाता है।


Q7. “आरती कीजै हनुमान लला की” के साथ कौन-से मंत्र का जाप करें?

उत्तर: आप “ॐ हनुमते नमः” या “ॐ रामदूताय नमः” जैसे मंत्रों का जाप आरती से पहले या बाद में कर सकते हैं। यह मंत्र आरती की शक्ति को कई गुना बढ़ा देता है।


Q8. क्या हनुमान जी की आरती करने से डर और नकारात्मक विचार दूर होते हैं?

उत्तर:
बिलकुल। यह आरती मानसिक तनाव, भय और बुरे विचारों को दूर करने में बेहद प्रभावशाली है। यह आपकी ऊर्जा को सकारात्मक बनाकर आत्मबल में वृद्धि करती है।


Q9. क्या आरती करते समय कुछ विशेष सावधानियाँ रखनी चाहिए?

उत्तर: हाँ, आरती करते समय साफ-सुथरे वस्त्र पहनें, मन को शांत रखें और श्रद्धा से आरती करें।


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निष्कर्ष

“आरती कीजै हनुमान लला की “ केवल एक भजन नहीं, बल्कि एक आत्मिक साधना है जो भक्त को संकट से उबारती है और जीवन में सफलता दिलाती है। नियमित आरती से हनुमान जी की कृपा बनी रहती है और सभी कष्ट दूर होते हैं।

यदि आप इस आरती को नियमित गाते हैं, तो यह आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास भर देगा।

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