2026 Sankashti Chaturthi Vrat Dates: संकष्टी चतुर्थी कब है? पूरी तारीख, पूजा विधि, चंद्रोदय समय, व्रत कथा, महत्व और नियम
Sankashti Chaturthi 2026 Dates: जानें 2026 में संकष्टी चतुर्थी कब-कब है, 13 व्रत की पूरी तारीख, अंगारकी चतुर्थी, चंद्रोदय समय, पूजा विधि, व्रत कथा, नियम, महत्व और शहरवार जानकारी।
Sankashti Chaturthi 2026: संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक महत्वपूर्ण मासिक व्रत है। यह व्रत प्रत्येक चंद्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। वर्ष 2026 में संकष्टी चतुर्थी कई महत्वपूर्ण तिथियों पर पड़ेगी। मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को अंगारकी चतुर्थी कहा जाता है और इसे विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
अगर आप जानना चाहते हैं कि 2026 में Sankashti Chaturthi कब है, संकष्टी चतुर्थी की तारीख क्या है, चंद्रमा कब निकलेगा, व्रत कब खोलना चाहिए, पूजा कैसे करनी चाहिए और कौन-से नियमों का पालन करना चाहिए, तो यह संपूर्ण गाइड आपके लिए है।
महत्वपूर्ण: संकष्टी चतुर्थी का व्रत सामान्यतः उस दिन रखा जाता है जिस दिन चतुर्थी तिथि के दौरान चंद्रोदय होता है। इसलिए अलग-अलग शहरों में व्रत और चंद्रोदय का समय थोड़ा अलग हो सकता है।

2026 में संकष्टी चतुर्थी कब-कब है?
2026 में संकष्टी चतुर्थी की प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं:
| क्रम | संकष्टी चतुर्थी | तारीख | वार | चतुर्थी तिथि समाप्ति | विशेष नाम |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | जनवरी संकष्टी | 6 जनवरी 2026 | मंगलवार | 7 जनवरी सुबह | लंबोदर संकष्टी / सकट चौथ |
| 2 | फरवरी संकष्टी | 5 फरवरी 2026 | गुरुवार | 6 फरवरी | द्विजप्रिय संकष्टी |
| 3 | मार्च संकष्टी | 6 मार्च 2026 | शुक्रवार | 7 मार्च | भालचंद्र संकष्टी |
| 4 | अप्रैल संकष्टी | 5 अप्रैल 2026 | रविवार | 6 अप्रैल | विकट संकष्टी |
| 5 | मई संकष्टी | 5 मई 2026 | मंगलवार | 6 मई | एकदंत संकष्टी |
| 6 | जून संकष्टी | 3 जून 2026 | बुधवार | 4 जून | विभुवन संकष्टी |
| 7 | जुलाई संकष्टी | 3 जुलाई 2026 | शुक्रवार | 4 जुलाई | कृष्णपिंगल संकष्टी |
| 8 | अगस्त संकष्टी | 2 अगस्त 2026 | रविवार | 2 अगस्त रात | गजानन संकष्टी |
| 9 | अगस्त संकष्टी | 31 अगस्त 2026 | सोमवार | 1 सितंबर सुबह | हेरंब संकष्टी |
| 10 | सितंबर संकष्टी | 29 सितंबर 2026 | मंगलवार | 30 सितंबर | विघ्नराज संकष्टी |
| 11 | अक्टूबर संकष्टी | 29 अक्टूबर 2026 | गुरुवार | 29 अक्टूबर रात | वक्रतुंड संकष्टी |
| 12 | नवंबर संकष्टी | 27 नवंबर 2026 | शुक्रवार | 28 नवंबर सुबह | गणाधिप संकष्टी |
| 13 | दिसंबर संकष्टी | 26 दिसंबर 2026 | शनिवार | 27 दिसंबर | आखुरथ संकष्टी |
ध्यान दें: 2026 में अगस्त महीने में दो संकष्टी चतुर्थी आती हैं—2 अगस्त और 31 अगस्त। 31 अगस्त की चतुर्थी को हेरंब संकष्टी के साथ बहुला चतुर्थी/बोल चौथ के रूप में भी जाना जाता है, विशेषकर गुजरात की परंपरा में।
Sankashti Chaturthi 2026 Dates – Month-Wise Complete List
1. लंबोदर संकष्टी चतुर्थी 2026
तारीख: 6 जनवरी 2026, मंगलवार
जनवरी 2026 की संकष्टी चतुर्थी को लंबोदर संकष्टी कहा जाता है। उत्तर भारत में इसी समय की संकष्टी चतुर्थी को सकट चौथ के नाम से भी जाना जाता है।
चतुर्थी तिथि:
- प्रारंभ: 6 जनवरी, सुबह 08:01 बजे
- समाप्त: 7 जनवरी, सुबह 06:52 बजे
- चंद्रोदय: लगभग 20:59 बजे, स्थान के अनुसार परिवर्तन संभव
2. द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026
तारीख: 5 फरवरी 2026, गुरुवार
फरवरी में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी कहा जाता है।
चतुर्थी तिथि:
- प्रारंभ: 5 फरवरी, 00:09 बजे
- समाप्त: 6 फरवरी, 00:22 बजे
- चंद्रोदय: लगभग 21:39 बजे
3. भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 2026
तारीख: 6 मार्च 2026, शुक्रवार
मार्च की संकष्टी चतुर्थी भालचंद्र संकष्टी कहलाती है।
चतुर्थी तिथि:
- प्रारंभ: 6 मार्च, 17:53 बजे
- समाप्त: 7 मार्च, 19:17 बजे
- चंद्रोदय: लगभग 21:18 बजे
4. विकट संकष्टी चतुर्थी 2026
तारीख: 5 अप्रैल 2026, रविवार
अप्रैल में भगवान गणेश के विकट स्वरूप की पूजा की जाती है।
चतुर्थी तिथि:
- प्रारंभ: 5 अप्रैल, 11:59 बजे
- समाप्त: 6 अप्रैल, 14:10 बजे
- चंद्रोदय: लगभग 21:58 बजे
5. एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2026
तारीख: 5 मई 2026, मंगलवार
मई की संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ने के कारण इसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाएगा।
चतुर्थी तिथि:
- प्रारंभ: 5 मई, 05:24 बजे
- समाप्त: 6 मई, 07:51 बजे
- चंद्रोदय: लगभग 22:35 बजे
अंगारकी चतुर्थी को भगवान गणेश की उपासना के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।
6. विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026
तारीख: 3 जून 2026, बुधवार
जून की संकष्टी को विभुवन संकष्टी कहा जाता है।
चतुर्थी तिथि:
- प्रारंभ: 3 जून, 21:21 बजे
- समाप्त: 4 जून, 23:30 बजे
- चंद्रोदय: लगभग 22:04 बजे
7. कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी 2026
तारीख: 3 जुलाई 2026, शुक्रवार
जुलाई की संकष्टी चतुर्थी को कृष्णपिंगल संकष्टी कहा जाता है।
चतुर्थी तिथि:
- प्रारंभ: 3 जुलाई, 11:20 बजे
- समाप्त: 4 जुलाई, 12:39 बजे
- चंद्रोदय: लगभग 21:53 बजे
8. गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026
तारीख: 2 अगस्त 2026, रविवार
अगस्त की पहली संकष्टी चतुर्थी गजानन संकष्टी के नाम से जानी जाती है।
चतुर्थी तिथि:
- प्रारंभ: 1 अगस्त, 23:07 बजे
- समाप्त: 2 अगस्त, 23:15 बजे
- चंद्रोदय: लगभग 21:24 बजे
9. हेरंब संकष्टी चतुर्थी 2026
31 अगस्त 2026 को है संकष्टी चतुर्थी
तारीख: 31 अगस्त 2026, सोमवार
अगस्त 2026 की दूसरी संकष्टी चतुर्थी हेरंब संकष्टी कहलाती है। इसी दिन गुजरात और कुछ क्षेत्रों में बहुला चतुर्थी या बोल चौथ भी मनाई जाती है।
चतुर्थी तिथि:
- प्रारंभ: 31 अगस्त 2026, सुबह 08:50 बजे
- समाप्त: 1 सितंबर 2026, सुबह 07:41 बजे
- चंद्रोदय: लगभग 20:29 बजे
31 अगस्त 2026 को कौन-सा व्रत है?
31 अगस्त 2026 को क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार कई नामों से संबंधित धार्मिक व्रत देखे जा सकते हैं:
- हेरंब संकष्टी चतुर्थी
- बहुला चतुर्थी
- बोल चौथ
इसलिए गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और अन्य क्षेत्रों में स्थानीय पंचांग एवं परंपरा के अनुसार पूजा-विधि में अंतर हो सकता है।
10. विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी 2026
तारीख: 29 सितंबर 2026, मंगलवार
सितंबर की संकष्टी मंगलवार को पड़ने के कारण यह अंगारकी संकष्टी भी मानी जाएगी।
चतुर्थी तिथि:
- प्रारंभ: 29 सितंबर, 17:09 बजे
- समाप्त: 30 सितंबर, 14:55 बजे
- चंद्रोदय: लगभग 19:44 बजे
11. वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी 2026
तारीख: 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार
अक्टूबर की संकष्टी को वक्रतुंड संकष्टी कहा जाता है। इसी दिन कई क्षेत्रों में करवा चौथ भी पड़ता है।
चतुर्थी तिथि:
- प्रारंभ: 29 अक्टूबर, 01:06 बजे
- समाप्त: 29 अक्टूबर, 22:09 बजे
- चंद्रोदय: लगभग 20:17 बजे
12. गणाधिप संकष्टी चतुर्थी 2026
तारीख: 27 नवंबर 2026, शुक्रवार
नवंबर की संकष्टी चतुर्थी गणाधिप संकष्टी कहलाती है।
चतुर्थी तिथि:
- प्रारंभ: 27 नवंबर, 09:48 बजे
- समाप्त: 28 नवंबर, 06:39 बजे
- चंद्रोदय: लगभग 20:18 बजे
13. आखुरथ संकष्टी चतुर्थी 2026
तारीख: 26 दिसंबर 2026, शनिवार
2026 की अंतिम संकष्टी चतुर्थी आखुरथ संकष्टी है।
चतुर्थी तिथि:
- प्रारंभ: 26 दिसंबर, 20:04 बजे
- समाप्त: 27 दिसंबर, 17:12 बजे
- चंद्रोदय: लगभग 20:19 बजे
संकष्टी चतुर्थी क्या है?
संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश की आराधना के लिए रखा जाने वाला मासिक व्रत है। ‘संकष्टी’ का अर्थ संकट से मुक्ति या कठिनाइयों का निवारण माना जाता है।
हिंदू चंद्र कैलेंडर में प्रत्येक महीने दो चतुर्थी आती हैं:
- कृष्ण पक्ष की चतुर्थी — संकष्टी चतुर्थी
- शुक्ल पक्ष की चतुर्थी — विनायक चतुर्थी
संकष्टी चतुर्थी का व्रत विशेष रूप से भगवान गणेश को प्रसन्न करने, बाधाओं को दूर करने और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है।
Sankashti Chaturthi 2026 पूजा विधि
संकष्टी चतुर्थी के दिन पूजा सामान्यतः निम्न तरीके से की जाती है:
सुबह की तैयारी
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान की सफाई करके भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
भगवान गणेश का पूजन
गणेश जी को निम्न सामग्री अर्पित की जा सकती है:
- जल
- पंचामृत
- लाल या पीले फूल
- दूर्वा
- सिंदूर
- अक्षत
- धूप
- दीप
- नैवेद्य
- मोदक या लड्डू
गणेश मंत्र का जाप
पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप किया जा सकता है।
गणेश चालीसा और व्रत कथा
पूजा में गणेश चालीसा, संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा और गणेश आरती का पाठ किया जाता है।
चंद्रोदय के बाद व्रत खोलना
संकष्टी चतुर्थी व्रत का सबसे महत्वपूर्ण चरण चंद्रोदय के बाद गणेश पूजा और चंद्र दर्शन है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद भगवान गणेश की पूजा करके व्रत का पारण किया जाता है।
Sankashti Chaturthi Vrat में क्या खाएं?
व्रत की परंपरा परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सामान्यतः फलाहार में इन चीजों का सेवन किया जाता है:
- फल
- दूध
- दही
- साबूदाना
- मूंगफली
- आलू
- शकरकंद
- सिंघाड़े का आटा
- राजगीरा
कई भक्त पूरे दिन निर्जल या केवल फलाहार व्रत भी रखते हैं। व्रत की कठोरता व्यक्ति की क्षमता और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करती है।
Sankashti Chaturthi पर क्या नहीं करना चाहिए?
व्रत रखने वाले भक्त सामान्यतः निम्न बातों का ध्यान रखते हैं:
- तामसिक भोजन से बचें।
- मांसाहार और मदिरा का सेवन न करें।
- अनावश्यक क्रोध और विवाद से बचें।
- भगवान गणेश की पूजा श्रद्धापूर्वक करें।
- चंद्रोदय के समय पूजा और अर्घ्य की परंपरा का पालन करें।
- अपने क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार सही चंद्रोदय समय देखें।
मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी: अंगारकी चतुर्थी
जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार के दिन पड़ती है, तो उसे अंगारकी चतुर्थी कहा जाता है।
2026 में मंगलवार को आने वाली प्रमुख संकष्टी तिथियों में:
- 6 जनवरी 2026
- 5 मई 2026
- 29 सितंबर 2026
शामिल हैं।
अंगारकी चतुर्थी को भगवान गणेश की उपासना के लिए विशेष महत्व दिया जाता है। महाराष्ट्र में इस दिन गणपति मंदिरों में विशेष पूजा और दर्शन की परंपरा है।
संकष्टी चतुर्थी का व्रत क्यों रखा जाता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश विघ्नहर्ता और बुद्धि एवं शुभता के देवता हैं। इसलिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से जीवन के संकट और बाधाएं दूर होने तथा शुभ फल प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है।
भक्त इस दिन भगवान गणेश से विशेष रूप से:
- संकटों से मुक्ति
- कार्यों में सफलता
- बुद्धि और विवेक
- सुख-समृद्धि
- परिवार की मंगलकामना
की प्रार्थना करते हैं।
अलग-अलग शहरों में Sankashti Chaturthi की तारीख क्यों बदल सकती है?
यह संकष्टी चतुर्थी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
सिर्फ चतुर्थी तिथि शुरू होने और समाप्त होने के आधार पर व्रत का दिन तय नहीं किया जाता। चंद्रोदय का समय भी महत्वपूर्ण होता है।
क्योंकि भारत के अलग-अलग शहरों में चंद्रमा के उदय का समय अलग होता है, इसलिए कुछ परिस्थितियों में अलग-अलग स्थानों पर व्रत के समय में अंतर हो सकता है।
उदाहरण के लिए:
मुंबई, महाराष्ट्र में चंद्रोदय का समय दिल्ली, नई दिल्ली से अलग हो सकता है।
इसी तरह:
- Ahmedabad
- Surat
- Vadodara
- Jaipur
- Udaipur
- Delhi
- Mumbai
- Pune
- Nashik
- Nagpur
- Bengaluru
- Chennai
- Hyderabad
- Kolkata
- Lucknow
- Varanasi
- Indore
- Bhopal
जैसे शहरों में चंद्रोदय समय अलग-अलग हो सकता है।
इसलिए “Sankashti Chaturthi 2026 Mumbai”, “Sankashti Chaturthi 2026 Delhi”, “Sankashti Chaturthi 2026 Pune”, “Sankashti Chaturthi 2026 Ahmedabad” जैसे स्थान-विशिष्ट keywords के लिए स्थानीय पंचांग देखना अधिक उचित है।
शहर के अनुसार Sankashti Chaturthi 2026
| शहर | Search Intent | क्या जांचें |
|---|---|---|
| Mumbai | Sankashti Chaturthi 2026 Mumbai | चंद्रोदय और पूजा समय |
| Pune | Sankashti Chaturthi 2026 Pune | चंद्र दर्शन समय |
| Nagpur | Sankashti Chaturthi 2026 Nagpur | स्थानीय पंचांग |
| Delhi | Sankashti Chaturthi 2026 Delhi | चंद्रोदय |
| Jaipur | Sankashti Chaturthi 2026 Jaipur | स्थानीय समय |
| Ahmedabad | Sankashti Chaturthi 2026 Ahmedabad | चंद्रोदय एवं व्रत |
| Surat | Sankashti Chaturthi 2026 Surat | स्थानीय पंचांग |
| Vadodara | Sankashti Chaturthi 2026 Vadodara | चंद्र दर्शन |
| Bengaluru | Sankashti Chaturthi 2026 Bangalore | चंद्रोदय |
| Chennai | Sankashti Chaturthi 2026 Chennai | स्थानीय समय |
| Hyderabad | Sankashti Chaturthi 2026 Hyderabad | चंद्रोदय |
| Kolkata | Sankashti Chaturthi 2026 Kolkata | स्थानीय पंचांग |
| Lucknow | Sankashti Chaturthi 2026 Lucknow | चंद्र दर्शन |
| Varanasi | Sankashti Chaturthi 2026 Varanasi | स्थानीय समय |
| Indore | Sankashti Chaturthi 2026 Indore | चंद्रोदय |
| Bhopal | Sankashti Chaturthi 2026 Bhopal | स्थानीय पंचांग |
Sankashti Chaturthi और Sakat Chauth में क्या अंतर है?
उत्तर भारत में माघ कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी को अक्सर सकट चौथ कहा जाता है।
दोनों का संबंध भगवान गणेश की पूजा और चतुर्थी व्रत से है, लेकिन क्षेत्रीय परंपराओं के कारण इनके नाम और पूजा की विधियों में अंतर दिखाई देता है।
2026 में सकट चौथ 6 जनवरी को है।
Sankashti Chaturthi Vrat Katha
संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की व्रत कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा है। व्रत कथा का उद्देश्य भगवान गणेश की महिमा, उनकी कृपा और संकटों से मुक्ति की धार्मिक मान्यता को स्मरण करना है।
भक्त पूजा के दौरान गणेश जी की कथा सुनकर आरती करते हैं और अंत में चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं।
आप अपनी पूजा के लिए संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का विस्तृत पाठ भी तैयार कर सकते हैं और उसे इस लेख से जोड़ सकते हैं।
Sankashti Chaturthi Puja के लिए आवश्यक सामग्री
| पूजा सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| गणेश जी की प्रतिमा | मुख्य पूजा |
| दूर्वा | गणेश जी को अर्पित |
| सिंदूर | गणेश पूजन |
| लाल फूल | पुष्प अर्पण |
| अक्षत | पूजन |
| दीपक | दीप पूजन |
| धूप | वातावरण शुद्धि की धार्मिक परंपरा |
| मोदक/लड्डू | नैवेद्य |
| फल | फलाहार/नैवेद्य |
| जल | अभिषेक एवं अर्घ्य |
| पंचामृत | अभिषेक |
| चंद्र अर्घ्य सामग्री | चंद्र दर्शन के बाद |
Sankashti Chaturthi पर चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें?
संकष्टी चतुर्थी में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा का दर्शन करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
सामान्य पूजा क्रम:
चंद्रोदय → चंद्र दर्शन → चंद्रमा को अर्घ्य → भगवान गणेश की पूजा → आरती → प्रसाद → व्रत पारण
स्थानीय परंपरा के अनुसार क्रम में कुछ बदलाव हो सकते हैं।
2026 Sankashti Chaturthi: Quick Answer
2026 में संकष्टी चतुर्थी कुल 13 अवसरों पर आएगी, क्योंकि अगस्त 2026 में दो संकष्टी चतुर्थी पड़ती हैं।
2026 की पहली संकष्टी चतुर्थी: 6 जनवरी 2026
2026 की अंतिम संकष्टी चतुर्थी: 26 दिसंबर 2026
पहली अंगारकी चतुर्थी: 6 जनवरी 2026
मई की अंगारकी चतुर्थी: 5 मई 2026
सितंबर की अंगारकी चतुर्थी: 29 सितंबर 2026
31 अगस्त 2026: हेरंब संकष्टी चतुर्थी तथा क्षेत्रीय रूप से बहुला चतुर्थी/बोल चौथ
Frequently Asked Questions (FAQ)
2026 में संकष्टी चतुर्थी कब है?
2026 में संकष्टी चतुर्थी की पहली तिथि 6 जनवरी और अंतिम तिथि 26 दिसंबर है। वर्ष में कुल 13 संकष्टी चतुर्थी आती हैं क्योंकि अगस्त में दो संकष्टी चतुर्थी पड़ती हैं।
Sankashti Chaturthi 2026 की तारीख क्या है?
2026 की संकष्टी चतुर्थी की प्रमुख तारीखें हैं: 6 जनवरी, 5 फरवरी, 6 मार्च, 5 अप्रैल, 5 मई, 3 जून, 3 जुलाई, 2 अगस्त, 31 अगस्त, 29 सितंबर, 29 अक्टूबर, 27 नवंबर और 26 दिसंबर।
31 अगस्त 2026 को कौन-सी संकष्टी है?
31 अगस्त 2026 को हेरंब संकष्टी चतुर्थी है। इसी दिन गुजरात की परंपरा में बहुला चतुर्थी/बोल चौथ भी मनाई जाती है।
क्या संकष्टी चतुर्थी हर महीने आती है?
हाँ। सामान्यतः प्रत्येक चंद्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है।
मंगलवार की संकष्टी चतुर्थी को क्या कहते हैं?
मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को अंगारकी चतुर्थी कहा जाता है।
Sankashti Chaturthi का व्रत कब खोलना चाहिए?
सामान्य परंपरा में चंद्रोदय के बाद भगवान गणेश की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है।
क्या संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा को अर्घ्य देना जरूरी है?
कई परंपराओं में चंद्र दर्शन और अर्घ्य व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। हालांकि स्थानीय और पारिवारिक परंपराएं अलग हो सकती हैं।
Sankashti Chaturthi पर क्या खा सकते हैं?
व्रत की परंपरा के अनुसार फल, दूध, साबूदाना, आलू, मूंगफली, शकरकंद, सिंघाड़े का आटा और अन्य फलाहारी पदार्थ लिए जा सकते हैं।
क्या Sankashti Chaturthi और Ganesh Chaturthi एक ही हैं?
नहीं। संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आती है, जबकि गणेश चतुर्थी/विनायक चतुर्थी शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है।
Sankashti Chaturthi का महत्व क्या है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश की पूजा और संकष्टी चतुर्थी व्रत से संकटों और बाधाओं से मुक्ति तथा शुभ फल की प्राप्ति होती है।
क्या अलग-अलग शहरों में Sankashti Chaturthi का समय अलग होता है?
हाँ। विशेष रूप से चंद्रोदय का समय स्थान के अनुसार बदलता है, इसलिए स्थानीय शहर का पंचांग देखना महत्वपूर्ण है।
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