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Kajari Teej 2026: Date, Time, Puja Vidhi, Vrat Katha & Muhurat

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Kajari Teej 2026: कजरी तीज कब है? 31 अगस्त को व्रत, पूजा विधि, शुभ समय, व्रत कथा, महत्व, नियम और संपूर्ण जानकारी

Kajari Teej 2026 31 अगस्त सोमवार को है। जानें कजरी तीज की तारीख, तिथि, शुभ समय, पूजा विधि, व्रत कथा, पूजा सामग्री, नियम, महत्व, राजस्थान और भारत में परंपराएं।

Kajari Teej 2026 Date: 31 अगस्त 2026, सोमवार
Kajari Teej 2026: कजरी तीज, कजली तीज, कजरी तीज व्रत, बड़ी तीज और सातुड़ी तीज के नाम से भी जानी जाती है।
तिथि: भाद्रपद कृष्ण पक्ष तृतीया
मुख्य आराध्य: भगवान शिव और माता पार्वती
प्रमुख क्षेत्र: राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तर भारत के अन्य क्षेत्र

Kajari Teej 2026 कब है? 31 अगस्त तारीख, पूजा विधि, व्रत कथा और शुभ मुहूर्त

कजरी तीज 2026 में सोमवार, 31 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। यह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला प्रमुख तीज पर्व है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की समृद्धि की कामना से व्रत एवं पूजा करती हैं। कई परंपराओं में अविवाहित महिलाएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से कजरी तीज का व्रत रखती हैं।

पंचांग गणना के अनुसार 2026 में तृतीया तिथि 30 अगस्त को सुबह लगभग 09:36 बजे प्रारंभ होकर 31 अगस्त को सुबह लगभग 08:50 बजे समाप्त होगी। स्थान के अनुसार पंचांग के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय शहर के पंचांग के अनुसार पूजा का समय देखना उचित है।

Kajari Teej 2026
Kajari Teej 2026

Kajari Teej 2026 Date and Time: कजरी तीज 2026 कब है?

विवरण जानकारी
कजरी तीज 2026 31 अगस्त 2026
दिन सोमवार
पक्ष कृष्ण पक्ष
तिथि तृतीया
तृतीया तिथि प्रारंभ 30 अगस्त 2026, लगभग 09:36 AM
तृतीया तिथि समाप्त 31 अगस्त 2026, लगभग 08:50 AM
प्रमुख पूजा भगवान शिव और माता पार्वती
अन्य नाम कजली तीज, कजरी तीज, बड़ी तीज, सातुड़ी तीज
प्रमुख राज्य राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार
व्रत का प्रमुख उद्देश्य दांपत्य सुख, पति की दीर्घायु और परिवार की मंगलकामना

महत्वपूर्ण: पंचांग की गणना शहर के अक्षांश-देशांतर और सूर्योदय के आधार पर बदल सकती है। इसलिए जयपुर, दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, मुंबई, भोपाल या अन्य शहर में रहने वाले श्रद्धालु स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि और पूजा समय की पुष्टि करें। उदाहरण के लिए मुंबई में 31 अगस्त 2026 को कृष्ण पक्ष तृतीया सुबह लगभग 08:52 तक दिखाई जाती है।

Kajari Teej 2026: कजरी तीज क्यों मनाई जाती है?

कजरी तीज हिंदू परंपरा में महिलाओं के प्रमुख व्रत-पर्वों में से एक है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति श्रद्धा, वैवाहिक जीवन की मंगलकामना और परिवार की सुख-समृद्धि से जुड़ा हुआ है।

कजरी तीज को वर्ष की प्रमुख तीन तीजों में शामिल किया जाता है:

  1. हरियाली तीज
  2. कजरी तीज
  3. हरतालिका तीज

हरियाली तीज सावन मास में प्रकृति, सौंदर्य और शिव-पार्वती आराधना से जुड़ी होती है, जबकि कजरी तीज भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया से संबंधित है। हरियाली तीज के लगभग 15 दिन बाद कजरी तीज आती है।

कजरी तीज के अन्य नाम

भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व को अलग-अलग नामों से जाना जाता है।

नाम लोकप्रियता/प्रयोग
Kajari Teej सबसे सामान्य नाम
Kajri Teej वैकल्पिक अंग्रेजी वर्तनी
Kajali Teej कई क्षेत्रों में प्रचलित
कजरी तीज हिंदी नाम
कजली तीज हिंदी का प्रचलित रूप
बड़ी तीज हरियाली तीज के संदर्भ में
सातुड़ी तीज कुछ क्षेत्रों में प्रचलित नाम

इसी कारण Google पर लोग इसे Kajari Teej 2026, Kajri Teej 2026, Kajali Teej 2026, Badi Teej 2026 और Satudi Teej 2026 जैसे अलग-अलग keywords से खोजते हैं।

Kajari Teej 2026 Puja Vidhi: कजरी तीज की पूजा विधि

कजरी तीज पर पूजा की स्थानीय परंपरा परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है। सामान्य रूप से पूजा की प्रक्रिया इस प्रकार रखी जा सकती है।

1. प्रातः स्नान और संकल्प

सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को साफ करें और व्रत रखने का संकल्प लें।

2. पूजा स्थान तैयार करें

एक साफ चौकी पर लाल या पीले वस्त्र बिछाएं। भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

3. कलश स्थापना

परंपरा के अनुसार कलश स्थापित किया जा सकता है। कलश में जल भरकर आम के पत्ते और नारियल रखा जाता है।

4. भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा

भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, पुष्प और अन्य उपलब्ध पूजा सामग्री अर्पित करें। माता पार्वती को सिंदूर, कुमकुम, अक्षत, पुष्प, वस्त्र अथवा श्रृंगार सामग्री अर्पित की जा सकती है।

5. धूप और दीप प्रज्वलित करें

पूजा के दौरान दीपक और धूप जलाएं तथा भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।

6. मंत्र जाप

श्रद्धा के अनुसार भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र जाप किया जा सकता है:

ॐ नमः शिवाय

माता पार्वती की आराधना के साथ शिव-पार्वती का संयुक्त स्मरण करना भी परंपरागत रूप से शुभ माना जाता है।

7. कजरी तीज व्रत कथा

पूजा के दौरान कजरी तीज की व्रत कथा सुनना या पढ़ना कई परिवारों की परंपरा है।

8. आरती

पूजा पूर्ण होने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें तथा परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

Kajari Teej 2026 Puja Samagri: कजरी तीज पूजा सामग्री सूची

कजरी तीज की पूजा के लिए सामग्री क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। सामान्य रूप से निम्न सामग्री उपयोग की जा सकती है।

पूजा सामग्री उपयोग
भगवान शिव-पार्वती की प्रतिमा/चित्र मुख्य पूजा
कलश स्थापना
जल अभिषेक एवं पूजा
दूध शिव अभिषेक
बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित
पुष्प पूजा एवं श्रृंगार
अक्षत पूजन
रोली/कुमकुम तिलक
सिंदूर माता पार्वती को अर्पण
दीपक आरती
धूप/अगरबत्ती पूजा
फल नैवेद्य
मिठाई भोग
नारियल पूजा
पान-सुपारी पारंपरिक पूजा सामग्री
मेहंदी सुहाग श्रृंगार
चूड़ियां सुहाग सामग्री
चुनरी माता पार्वती का श्रृंगार
दक्षिणा ब्राह्मण/पुजारी सेवा

यदि किसी विशेष कुल, क्षेत्र या मंदिर की परंपरा के अनुसार पूजा करनी हो तो स्थानीय आचार्य या पुरोहित से सामग्री की पुष्टि करना बेहतर है।

Kajari Teej Vrat: कजरी तीज का व्रत कैसे रखें?

कजरी तीज का व्रत महिलाएं अपनी पारिवारिक एवं धार्मिक परंपरा के अनुसार रखती हैं। व्रत का स्वरूप सभी क्षेत्रों में समान नहीं होता।

कुछ महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, जबकि कुछ स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार फलाहार या जल ग्रहण करती हैं।

इसलिए व्रत रखने से पहले अपनी शारीरिक क्षमता, स्थानीय परंपरा और परिवार की धार्मिक मान्यता को ध्यान में रखना चाहिए।

व्रत का उद्देश्य केवल कठिन उपवास करना नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम और भगवान शिव-माता पार्वती की आराधना करना है।

Kajari Teej Vrat Rules: कजरी तीज व्रत के नियम

कजरी तीज के दौरान सामान्य रूप से इन बातों का ध्यान रखा जाता है:

  1. सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
  2. पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
  3. भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
  4. व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
  5. अपनी परंपरा के अनुसार फलाहार या निर्जल व्रत रखें।
  6. क्रोध, विवाद और नकारात्मक व्यवहार से बचें।
  7. जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या वस्त्र का दान करें।
  8. पूजा के बाद परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
  9. व्रत खोलने का समय अपनी स्थानीय परंपरा और पंचांग के अनुसार रखें।

Kajari Teej Vrat Katha: कजरी तीज व्रत कथा का महत्व

कजरी तीज के अवसर पर व्रत कथा सुनने की परंपरा कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण मानी जाती है। कथा का उद्देश्य केवल धार्मिक कहानी सुनना नहीं बल्कि व्रत के संकल्प, श्रद्धा, दांपत्य निष्ठा और भगवान शिव-पार्वती के प्रति भक्ति को स्मरण करना भी है।

कथा और पूजा की विधि में क्षेत्रीय अंतर मिल सकता है। इसलिए यदि आप किसी विशेष समुदाय, कुल या क्षेत्र की परंपरा के अनुसार कजरी तीज व्रत कथा करना चाहते हैं तो स्थानीय विद्वान या प्रमाणित पंडित से विधि पूछना उचित है।

Kajari Teej and Shiva-Parvati: शिव-पार्वती पूजा का महत्व

कजरी तीज में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा को विशेष स्थान दिया जाता है।

हिंदू धार्मिक परंपरा में शिव और पार्वती को दांपत्य जीवन, प्रेम, समर्पण और पारिवारिक संतुलन के आदर्श रूप में देखा जाता है। इसी कारण विवाहित महिलाएं इस पर्व पर अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति तथा पति और परिवार के मंगल की प्रार्थना करती हैं।

अविवाहित महिलाएं भी अपनी धार्मिक मान्यता के अनुसार अच्छे जीवनसाथी की कामना से पूजा और व्रत कर सकती हैं।

Kajari Teej in Rajasthan: राजस्थान में कजरी तीज

राजस्थान में तीज पर्व का सांस्कृतिक महत्व बहुत व्यापक है। यहां तीज से जुड़े उत्सव, लोकगीत, झूले, पारंपरिक वेशभूषा और धार्मिक कार्यक्रम लंबे समय से लोक संस्कृति का हिस्सा रहे हैं।

जयपुर

जयपुर में तीज की परंपरा राजस्थानी संस्कृति और शाही विरासत से जुड़ी हुई है। तीज से संबंधित पारंपरिक आयोजन, शोभायात्राएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम जयपुर की पहचान का हिस्सा रहे हैं।

बूंदी

बूंदी की कजली तीज विशेष रूप से प्रसिद्ध है। राजस्थान पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट भी कजली तीज को बूंदी की विशिष्ट परंपरा के रूप में उल्लेखित करती है।

कोटा

कोटा और आसपास के हाड़ौती क्षेत्र में भी तीज से जुड़ी लोक परंपराओं का सांस्कृतिक महत्व है।

Kajari Teej in Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में कजरी तीज

उत्तर प्रदेश में कजरी तीज विशेष रूप से महिलाओं के व्रत, पूजा, लोकगीत और पारंपरिक सामाजिक उत्सव से जुड़ी हुई है।

वाराणसी, मिर्जापुर, प्रयागराज, लखनऊ, अयोध्या और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में तीज और कजरी लोक परंपरा का सांस्कृतिक महत्व देखने को मिलता है।

वाराणसी और मिर्जापुर क्षेत्र में कजरी लोकगीतों की परंपरा विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इसलिए Kajari Teej केवल धार्मिक व्रत ही नहीं, बल्कि उत्तर भारतीय लोक-संस्कृति और संगीत से भी जुड़ा हुआ पर्व है।

Kajari Teej in Madhya Pradesh and Bihar

मध्य प्रदेश और बिहार में भी कजरी तीज महिलाओं के धार्मिक जीवन का महत्वपूर्ण पर्व है। अलग-अलग समुदायों में व्रत, पूजा, कथा और पारंपरिक भोजन की विधि में स्थानीय अंतर हो सकता है।

इसलिए किसी दूसरे शहर की पूजा विधि को हूबहू अपनाने के बजाय अपने परिवार और स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा करना बेहतर है।

Kajari Teej 2026 vs Hariyali Teej vs Hartalika Teej

तीज के तीन प्रमुख पर्वों को लेकर अक्सर लोगों में भ्रम होता है।

विशेषता हरियाली तीज कजरी तीज हरतालिका तीज
समय सावन भाद्रपद कृष्ण पक्ष भाद्रपद
प्रमुख स्वरूप शिव-पार्वती पूजा शिव-पार्वती पूजा और व्रत शिव-पार्वती आराधना
लोकप्रियता उत्तर भारत एवं राजस्थान राजस्थान, UP, MP, बिहार आदि पूरे उत्तर भारत सहित कई क्षेत्र
दूसरा नाम छोटी तीज बड़ी तीज/कजली तीज हरतालिका
प्रमुख विषय सावन और सौभाग्य दांपत्य सुख एवं मंगलकामना शिव-पार्वती भक्ति एवं व्रत

कजरी तीज को हरियाली तीज से अलग समझना महत्वपूर्ण है। उपलब्ध पंचांग स्रोत भी तीन प्रमुख तीजों में हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज को अलग-अलग पर्व के रूप में बताते हैं।

Kajari Teej 2026: क्या करें?

कजरी तीज पर निम्न धार्मिक कार्य श्रद्धा के साथ किए जा सकते हैं:

Kajari Teej 2026: क्या न करें?

धार्मिक व्रत में अनुशासन और श्रद्धा को प्राथमिकता दी जाती है।

Kajari Teej 2026 Puja Booking: घर पर कजरी तीज पूजा कैसे करवाएं?

आज बहुत से परिवार व्यस्त जीवनशैली, दूसरे शहर में रहने या सही पूजा सामग्री एवं विधि उपलब्ध न होने के कारण घर पर स्वयं पूजा करवाने के बजाय अनुभवी पंडित से पूजा करवाना पसंद करते हैं।

Panditji on Way के माध्यम से भक्त कजरी तीज सहित विभिन्न हिंदू पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पंडित सेवा बुक करने की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं।

कजरी तीज पूजा के लिए booking करते समय इन बातों की पुष्टि करना उपयोगी है:

  1. पूजा की तारीख और समय
  2. पूजा का स्थान
  3. पूजा की संपूर्ण विधि
  4. आवश्यक सामग्री
  5. पंडित की उपलब्धता
  6. दक्षिणा एवं सेवा शुल्क
  7. पूजा के बाद की प्रक्रिया
  8. विशेष पारिवारिक या क्षेत्रीय परंपरा
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Panditji on Way का उद्देश्य भक्तों को booking process से लेकर पूजा के अंतिम चरण तक सहायता उपलब्ध कराना है।

कजरी तीज पूजा बुकिंग के लिए Panditji on Way

Kajari Teej 2026: शहर के अनुसार पूजा का समय क्यों बदल सकता है?

हिंदू पंचांग में तिथि, सूर्योदय, सूर्यास्त और अन्य मुहूर्त स्थानीय स्थान के आधार पर बदल सकते हैं।

उदाहरण के लिए 31 अगस्त 2026 को मुंबई के पंचांग में कृष्ण पक्ष तृतीया लगभग 08:52 AM तक बताई गई है।

इसलिए:

Delhi ≠ Jaipur ≠ Mumbai ≠ Lucknow ≠ Varanasi

सभी शहरों के लिए एक ही minute-by-minute पूजा समय लागू करना सही नहीं है।

यदि आप किसी शहर में पूजा करवाना चाहते हैं, तो स्थानीय पंचांग के अनुसार समय निर्धारित करना बेहतर है।

Kajari Teej 2026: प्रमुख शहर के लिए Guide

शहर लोग क्या खोजते हैं
Jaipur Kajari Teej Puja in Jaipur
Delhi Kajari Teej Puja Delhi
Lucknow Kajari Teej Puja Lucknow
Varanasi Kajari Teej Puja Varanasi
Prayagraj Kajari Teej Puja Prayagraj
Ayodhya Kajari Teej Puja Ayodhya
Mumbai Kajari Teej Puja Mumbai
Kota Kajari Teej Puja Kota
Bundi Kajli Teej Bundi
Udaipur Kajari Teej Puja Udaipur
Jodhpur Kajari Teej Puja Jodhpur
Bhopal Kajari Teej Puja Bhopal
Indore Kajari Teej Puja Indore
Patna Kajari Teej Puja Patna

Kajari Teej 2026 Frequently Asked Questions

1. Kajari Teej 2026 कब है?

Kajari Teej 2026 सोमवार, 31 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। यह भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है।

2. कजरी तीज 2026 में किस दिन है?

कजरी तीज 2026 में सोमवार के दिन है।

3. कजरी तीज को और किस नाम से जाना जाता है?

कजरी तीज को कजली तीज, Kajri Teej, Kajali Teej, बड़ी तीज और सातुड़ी तीज भी कहा जाता है।

4. कजरी तीज किस भगवान की पूजा की जाती है?

कजरी तीज पर मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।

5. क्या अविवाहित लड़कियां कजरी तीज का व्रत रख सकती हैं?

हां। कई धार्मिक परंपराओं में अविवाहित महिलाएं अच्छे जीवनसाथी की कामना से कजरी तीज का व्रत रखती हैं। हालांकि व्रत की विधि परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

6. क्या कजरी तीज और हरियाली तीज एक ही है?

नहीं। दोनों अलग पर्व हैं। हरियाली तीज सावन में और कजरी तीज भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया पर मनाई जाती है।

7. क्या कजरी तीज और हरतालिका तीज एक ही है?

नहीं। कजरी तीज और हरतालिका तीज अलग-अलग व्रत एवं पर्व हैं।

8. कजरी तीज पर क्या पूजा सामग्री चाहिए?

सामान्य रूप से शिव-पार्वती की प्रतिमा, जल, दूध, बेलपत्र, पुष्प, अक्षत, रोली, कुमकुम, सिंदूर, दीपक, धूप, फल, मिठाई, नारियल और अन्य पारंपरिक पूजा सामग्री की आवश्यकता हो सकती है।

9. क्या कजरी तीज पर निर्जला व्रत रखना जरूरी है?

सभी लोगों के लिए निर्जला व्रत अनिवार्य नहीं माना जाना चाहिए। व्रत की परंपरा परिवार, समुदाय और व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर कठोर उपवास करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

10. कजरी तीज की पूजा कब करनी चाहिए?

पूजा का सही समय आपके शहर के पंचांग के अनुसार निर्धारित करना चाहिए क्योंकि तिथि और सूर्योदय संबंधी गणना स्थान के अनुसार बदल सकती है।

11. क्या कजरी तीज पर पंडित से पूजा करवा सकते हैं?

हां। जो परिवार संपूर्ण विधि से पूजा करवाना चाहते हैं वे योग्य पंडित या पुरोहित की सहायता ले सकते हैं। Panditji on Way के माध्यम से उपलब्ध सेवाओं के अनुसार पूजा booking की जा सकती है।

12. राजस्थान में कजरी तीज कहां प्रसिद्ध है?

बूंदी की कजली तीज विशेष रूप से प्रसिद्ध है। राजस्थान पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट भी इसे बूंदी की विशिष्ट परंपरा के रूप में बताती है।

Kajari Teej 2026 Quick Answer

Kajari Teej 2026 31 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी। यह भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि का पर्व है। कजरी तीज को कजली तीज, कजरी तीज, बड़ी तीज और सातुड़ी तीज भी कहा जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सुखी वैवाहिक जीवन, पति की दीर्घायु और परिवार के मंगल की कामना करती हैं। 2026 में तृतीया तिथि 30 अगस्त को सुबह लगभग 09:36 बजे शुरू होकर 31 अगस्त को सुबह लगभग 08:50 बजे समाप्त होने की गणना दी गई है; स्थानीय शहर के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।

Authoritative External Resources

कजरी तीज की तिथि और स्थानीय पंचांग की पुष्टि के लिए पाठक विश्वसनीय पंचांग स्रोत देख सकते हैं।

Panditji on Way से Kajari Teej Puja

कजरी तीज केवल एक तिथि नहीं बल्कि श्रद्धा, परिवार, दांपत्य जीवन और भारतीय संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है।

यदि आप 31 अगस्त 2026 को घर, मंदिर या किसी निर्धारित स्थान पर कजरी तीज पूजा विधि-विधान से करवाना चाहते हैं, तो पूजा की तारीख, स्थान, सामग्री और उपलब्ध पंडित की जानकारी पहले से सुनिश्चित करना उपयोगी है।

Panditji on Way भक्तों को पूजा booking process से लेकर पूजा के अंतिम चरण तक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया online pooja booking platform है।

कजरी तीज, शिव-पार्वती पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उपलब्ध सेवाओं की जानकारी के लिए:

Panditji on Way – Online Pooja Booking

Final Takeaway

Kajari Teej 2026 सोमवार, 31 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। यह भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि का प्रमुख तीज पर्व है। विवाहित महिलाएं इस दिन सुखी दांपत्य जीवन, पति की दीर्घायु और परिवार के मंगल की कामना से व्रत एवं शिव-पार्वती पूजा करती हैं। कजरी तीज को कजली तीज, कजरी तीज, बड़ी तीज और सातुड़ी तीज जैसे नामों से भी जाना जाता है।

तिथि का मूल पंचांग समय शहर के अनुसार थोड़ा बदल सकता है, इसलिए पूजा से पहले अपने स्थानीय स्थान के लिए पंचांग की पुष्टि करें।

यदि आप घर पर संपूर्ण विधि से कजरी तीज पूजा करवाना चाहते हैं, तो Panditji on Way के माध्यम से उपलब्ध पूजा सेवाओं और booking विकल्पों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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