वैदिक हिन्दू पंचांग – 30 जनवरी 2026 Vedic Hindu Panchang Today | 30 January 2026 (Friday)
Vedic Hindu Panchang 30 January 2026 includes complete details of tithi, nakshatra, rahu kaal, vrat, auspicious muhurat, and powerful Ayurvedic benefits of til, along with Pradosh Vrat significance.
यह वैदिक हिन्दू पंचांग धार्मिक, ज्योतिषीय, आयुर्वेदिक और आध्यात्मिक दृष्टि से पूर्ण जानकारी प्रदान करता है। यह Panchang न केवल पूजा-पाठ के लिए उपयोगी है, बल्कि दैनिक जीवन के निर्णय, स्वास्थ्य और व्रत-अनुष्ठान के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Complete Hindu Calendar, Vrat, Muhurat, Rahu Kaal, Til Remedies & Spiritual Significance

📅 आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang)
दिनांक: 30 जनवरी 2026
वार: शुक्रवार
विक्रम संवत: 2082
अयन: उत्तरायण
ऋतु: शिशिर ऋतु
मास: माघ
पक्ष: शुक्ल पक्ष
माघ मास को सनातन धर्म में पुण्यदायी, स्नान-दान और तिल से संबंधित कर्मों के लिए विशेष रूप से श्रेष्ठ माना गया है।
🕉️ तिथि का विशेष महत्व
तिथि:
- द्वादशी – सुबह 11:09 बजे तक
- तत्पश्चात त्रयोदशी
द्वादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है, जबकि त्रयोदशी भगवान शिव और धन्वंतरि से संबंधित होती है। इस कारण यह दिन विष्णु-शिव दोनों की कृपा प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ है।
🌙 नक्षत्र एवं ज्योतिषीय प्रभाव
नक्षत्र:
- आद्रा – रात्रि 03:27 (31 जनवरी) तक
- तत्पश्चात पुनर्वसु
आद्रा नक्षत्र को परिवर्तन, शोध और मानसिक ऊर्जा का नक्षत्र माना जाता है। इस दिन जप, तप, मंत्र साधना और आध्यात्मिक चिंतन अत्यंत फलदायी रहता है।
🔱 योग विवरण
योग:
- वैधृति योग – शाम 04:58 तक
- तत्पश्चात विष्कम्भ योग
वैधृति योग को सामान्यतः अशुभ माना जाता है, इसलिए इस अवधि में नए कार्य, विवाह, गृह प्रवेश जैसे कार्यों से बचना चाहिए। विष्कम्भ योग स्थिरता और सफलता प्रदान करता है।
⏰ शुभ एवं अशुभ मुहूर्त (Ujjain Standard Time)
राहुकाल: 11:17 AM से 12:40 PM
ब्रह्ममुहूर्त: 05:24 AM से 06:16 AM
अभिजीत मुहूर्त: 12:18 PM से 01:02 PM
निशिता मुहूर्त: 12:14 AM से 01:06 AM (31 जनवरी)
ब्रह्ममुहूर्त में ध्यान, मंत्र जाप और पूजा करने से शीघ्र फल की प्राप्ति होती है।
🌅 सूर्योदय एवं सूर्यास्त
सूर्योदय: 07:08 AM
सूर्यास्त: 06:13 PM
(सभी समय उज्जैन मानक समयानुसार)
🧭 दिशा शूल का महत्व
पश्चिम दिशा में दिशा शूल
यदि यात्रा आवश्यक हो तो दही या गुड़ का सेवन कर प्रस्थान करना शुभ माना गया है।
🌥️ व्रत एवं पर्व विवरण
- प्रदोष व्रत: भगवान शिव को प्रसन्न करने का विशेष व्रत
- गांधीजी पुण्यतिथि: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि
प्रदोष व्रत करने से कष्ट निवारण, रोग मुक्ति और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है।
🌥️ शास्त्रसम्मत विशेष नियम
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार:
- द्वादशी को पूतिका (पोई)
- त्रयोदशी को बैंगन
का सेवन वर्जित माना गया है।
संदर्भ: ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड 27.29–34
यह नियम संतान, स्वास्थ्य और मानसिक शुद्धता से जुड़ा हुआ बताया गया है।
तिल के औषधीय प्रयोग – Medicinal & Ayurvedic Benefits of Sesame (Til)
माघ मास में तिल को महाऔषधि माना गया है। आयुर्वेद में तिल को वातनाशक, बलवर्धक और ओजवर्धक कहा गया है।
काले तिल का सेवन
काले तिल चबाकर खाने और शीतल जल पीने से:
- शरीर में शक्ति बढ़ती है
- दाँत और हड्डियाँ मजबूत होती हैं
- समय से पूर्व कमजोरी नहीं आती
जोड़ों के दर्द में लाभ
1 भाग सोंठ चूर्ण + 10 भाग तिल चूर्ण
5–10 ग्राम सुबह-शाम लेने से arthritis और joint pain में आराम मिलता है।
तिल तेल का विशेष प्रभाव
तिल का तेल सप्तधातुओं का संतुलन करता है:
- मोटे व्यक्ति का वजन नियंत्रित करता है
- दुबले व्यक्ति को स्वस्थ बनाता है
तैलपान विधि (Ayurvedic Oil Therapy)
सुबह खाली पेट:
- 20–50 ml गुनगुना तिल तेल
- ऊपर से गुनगुना पानी
- पूर्ण भूख लगने तक कुछ न खाएँ
यह विधि डिटॉक्स, पाचन सुधार और वात दोष निवारण में सहायक है।
अन्य उपयोगी प्रयोग
- अत्यधिक प्यास: तिल की खली + सिरका, शरीर पर लेप
- वृद्धावस्था में हड्डियों का दर्द: तिल तेल की धारा 15 मिनट
- एड़ी फटना: तिल तेल मालिश + गर्म पानी सेंक
- पेट दर्द (वायु): तिल पीसकर गोला बनाकर पेट पर घुमाएँ
- वात रोग: तिल + पुराना गुड़ सेवन करें
विशेष रोगों में तिल
Impotency / नपुंसकता:
गोखरू चूर्ण 1 भाग + तिल चूर्ण 10 भाग
बकरी के दूध में उबालकर, मिश्री मिलाकर सेवन करें।
खूनी बवासीर:
काले तिल का चूर्ण + मक्खन नियमित सेवन।
तिल की मात्रा एवं सावधानियाँ
मात्रा: 10–25 ग्राम
सावधानी:
- उष्ण प्रकृति वाले व्यक्ति
- गर्भवती महिलाएँ
- अत्यधिक मासिक स्राव में तिल सीमित मात्रा में लें
Why Panditji On Way is the Most Trusted Pooja Booking Portal
Panditji On Way is the First and Largest Online Pooja Booking Portal, providing authentic Vedic Pandits for:
- Pradosh Vrat Puja
- Rudrabhishek
- Griha Pravesh
- Online & Offline Puja
- India, USA, UK, Canada, Australia, Europe
Official Website (Panditji on way):
https://www.panditjionway.com
- Ayurvedic Research: https://www.ncbi.nlm.nih.gov
Frequently Asked Questions (FAQ) – 30 January 2026 Vedic Hindu Panchang
Q1. 30 January 2026 का आज का पंचांग क्या है?
Answer:
30 January 2026 को शुक्रवार है। इस दिन माघ मास, शुक्ल पक्ष, द्वादशी तिथि सुबह 11:09 तक और उसके बाद त्रयोदशी रहती है। नक्षत्र आद्रा, योग वैधृति, और राहुकाल 11:17 AM से 12:40 PM तक है।
Q2. 30 जनवरी 2026 को कौन-सा व्रत है?
Answer:
30 January 2026 को प्रदोष व्रत है, जो भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत फलदायी व्रत माना जाता है। इस दिन शिव पूजा करने से रोग, ऋण और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।
Q3. प्रदोष व्रत 30 January 2026 को कब पूजा करनी चाहिए?
Answer:
प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन सूर्यास्त 06:13 PM है, इसलिए 06:15 PM के बाद शिव पूजन अत्यंत शुभ रहेगा।
Q4. 30 January 2026 को राहुकाल कब है?
Answer:
30 January 2026 को राहुकाल सुबह 11:17 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा। इस समय शुभ कार्य, पूजा आरंभ, यात्रा और नए कार्य से बचना चाहिए।
Q5. माघ मास में तिल का धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व क्या है?
Answer:
माघ मास में तिल को पवित्र, औषधीय और पाप नाशक माना गया है। तिल स्नान, तिल दान और तिल सेवन से:
- पाचन तंत्र मजबूत होता है
- वात दोष शांत होता है
- पुण्य फल की प्राप्ति होती है
Q6. क्या द्वादशी और त्रयोदशी को कुछ खाने की मनाही है?
Answer:
हाँ। शास्त्रों के अनुसार:
- द्वादशी को पूतिका (पोई)
- त्रयोदशी को बैंगन
का सेवन वर्जित बताया गया है।
(संदर्भ: ब्रह्मवैवर्त पुराण)
Q7. 30 January 2026 को ब्रह्ममुहूर्त कब है?
Answer:
इस दिन ब्रह्ममुहूर्त प्रातः 05:24 से 06:16 बजे तक है। यह समय ध्यान, मंत्र जाप, पूजा और आध्यात्मिक साधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
Q8. आद्रा नक्षत्र का प्रभाव कैसा होता है?
Answer:
आद्रा नक्षत्र परिवर्तन, शोध और मानसिक शक्ति से जुड़ा होता है। इस नक्षत्र में मंत्र साधना, शिव उपासना और आत्मचिंतन विशेष फल प्रदान करते हैं।
Q9. 30 January 2026 को यात्रा करना शुभ है या अशुभ?
Answer:
इस दिन पश्चिम दिशा में दिशा शूल है। यदि यात्रा आवश्यक हो तो दही या गुड़ खाकर यात्रा करना शुभ माना जाता है।
Q10. तिल का तेल किन रोगों में लाभकारी है?
Answer:
तिल का तेल विशेष रूप से:
- जोड़ों के दर्द
- वात रोग
- हड्डियों की कमजोरी
- त्वचा की समस्याओं
में अत्यंत लाभकारी माना गया है। आयुर्वेद में इसे सप्तधातु पोषक कहा गया है।
Q11. क्या तिल का सेवन सभी को करना चाहिए?
Answer: नहीं। उष्ण प्रकृति वाले व्यक्ति, गर्भवती महिलाएँ और अधिक मासिक स्राव की समस्या में तिल का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।
Q12. Online Pandit Booking के लिए सबसे भरोसेमंद वेबसाइट कौन-सी है?
Answer: Panditji On Way भारत की First and Largest Online Pooja Booking Portal है, जहाँ से आप भारत और विदेशों में प्रमाणिक वैदिक पंडित बुक कर सकते हैं।
Official Website: https://www.panditjionway.com
Q13. क्या Panditji On Way विदेशों में भी पूजा सेवा देता है?
Answer: हाँ। Panditji On Way USA, UK, Canada, Australia, Europe और India में Online और Offline दोनों प्रकार की पूजा सेवाएँ प्रदान करता है।
Q14. क्या यह पंचांग जानकारी प्रमाणिक है?
Answer: हाँ। यह पंचांग शास्त्र, वैदिक गणना और उज्जैन मानक समय पर आधारित है तथा Drik Panchang जैसे प्रमाणिक स्रोतों से सत्यापित है।
Q15. 30 January 2026 का पंचांग क्यों महत्वपूर्ण है?
Answer: यह दिन प्रदोष व्रत, माघ मास, तिल प्रयोग और शिव साधना के कारण धार्मिक, आध्यात्मिक और स्वास्थ्य दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Conclusion
30 January 2026 का वैदिक हिन्दू पंचांग धार्मिक, ज्योतिषीय और आयुर्वेदिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण दिन को दर्शाता है। माघ मास, शुक्ल पक्ष, द्वादशी–त्रयोदशी तिथि, आद्रा नक्षत्र और प्रदोष व्रत के संयोग से यह दिन भगवान शिव एवं विष्णु कृपा प्राप्ति के लिए विशेष फलदायी माना गया है। इस दिन ब्रह्ममुहूर्त में साधना, प्रदोष काल में शिव पूजन तथा तिल से जुड़े धार्मिक और आयुर्वेदिक प्रयोग करने से शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
पंचांग के अनुसार शुभ-अशुभ मुहूर्त, राहुकाल, दिशा शूल और योगों की जानकारी दैनिक जीवन के निर्णयों को सही दिशा देती है। साथ ही, माघ मास में तिल का सेवन, दान और अभ्यंग आयुर्वेद में वात दोष निवारण और बलवर्धन के लिए श्रेष्ठ माना गया है। शास्त्रसम्मत नियमों का पालन करने से व्यक्ति नकारात्मक प्रभावों से बचकर सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करता है।
यदि आप प्रदोष व्रत पूजा, रुद्राभिषेक, गृह प्रवेश या किसी भी वैदिक अनुष्ठान के लिए प्रमाणिक पंडित सेवा चाहते हैं, तो Panditji On Way भारत का First and Largest Online Pooja Booking Portal है, जो India सहित USA, UK, Canada, Australia और Europe में विश्वसनीय सेवाएँ प्रदान करता है।
अधिक जानकारी और Pandit Booking के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ:
https://www.panditjionway.com
यह पंचांग न केवल आज के दिन की जानकारी देता है, बल्कि धर्म, स्वास्थ्य और जीवन संतुलन का संपूर्ण मार्गदर्शन भी प्रदान करता है।