श्री चन्द्रशेखर अष्टकम हिंदी अर्थ सहित – Chandrashekhar Ashtakam with Hindi Meaning, महत्व, कथा, लाभ एवं पूजा विधि
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चन्द्रशेखर अष्टकम क्या है?
चन्द्रशेखर अष्टकम भगवान भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसकी रचना ऋषि मार्कंडेय ने की थी। चन्द्र का अर्थ है चंद्रमा और शेखर का अर्थ है मुकुट—अर्थात जिनके मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित है, वे चन्द्रशेखर शिव हैं।
हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना गया है। इस दिन चन्द्रशेखर अष्टकम का पाठ करने से मानसिक शांति, चंद्र दोष शांति और शिव कृपा प्राप्त होती है।
चन्द्रशेखर अष्टकम का पाठ क्यों करें?
- मानसिक तनाव, भय और नकारात्मकता से मुक्ति
- कुंडली में चंद्र दोष के प्रभाव में कमी
- आयु, स्वास्थ्य और सौभाग्य में वृद्धि
- मृत्यु भय से रक्षा (कालांतक शिव की कृपा)

श्री चन्द्रशेखर अष्टकम – Shri Chandrashekhar Ashtakam in Hindi
(मूल संस्कृत पाठ, सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ सहित विस्तृत विवरण)
श्री चन्द्रशेखर अष्टकम भगवान भगवान शिव की एक अत्यंत प्रभावशाली स्तुति है, जिसकी रचना महान शिवभक्त ऋषि मार्कंडेय ने की थी। यह स्तोत्र मृत्यु-भय, मानसिक तनाव, रोग, चंद्र दोष और नकारात्मक ऊर्जाओं से मुक्ति प्रदान करने वाला माना जाता है। प्रत्येक श्लोक के अंत में आने वाली पंक्ति
“चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः”
इस बात का प्रतीक है कि जो व्यक्ति भगवान शिव की शरण में है, उसके लिए मृत्यु के देवता यम भी निष्प्रभावी हो जाते हैं।
🔱 श्लोक 1 Shri Chandrashekhar Ashtakam in Hindi
चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर पाहिमाम् |
चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर रक्षमाम् ॥1॥
सरल हिंदी अर्थ:
हे चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण करने वाले भगवान शिव! कृपया मेरी रक्षा करें। हे चन्द्रशेखर! आप ही मेरे रक्षक और आश्रय हैं।
भावार्थ:
यह श्लोक पूर्ण शरणागति का प्रतीक है। साधक भगवान शिव से अपने जीवन, स्वास्थ्य और आत्मा की सुरक्षा की प्रार्थना करता है।
🔱 श्लोक 2 Shri Chandrashekhar Ashtakam
रत्नसानु शरासनं रजताद्रि शृङ्गनिकेतनम्
शिञ्जिनीकृत पन्नगेश्वरमच्युतानलसायकम् |
क्षिप्रदग्धपुरत्रयं त्रिदशालयैरभिवन्दितं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥2॥
सरल हिंदी अर्थ:
जिन्होंने मेरु पर्वत को धनुष बनाया, वासुकी नाग को प्रत्यंचा बनाया और भगवान विष्णु को बाण के रूप में प्रयोग कर त्रिपुर का नाश किया, जिनकी देवता भी वंदना करते हैं—मैं उन चन्द्रशेखर की शरण लेता हूँ, फिर यम मेरा क्या कर सकते हैं?
भावार्थ:
यह श्लोक भगवान शिव की अद्भुत शक्ति और त्रिपुरासुर वध की महिमा को दर्शाता है।
🔱 श्लोक 3 Shri Chandrashekhar Ashtakam
पञ्चपादप पुष्पगन्ध पदाम्बुजद्वयशोभितम्
फाललोचनजातपावक दग्धमन्मथविग्रहम् |
भस्मदिग्धकलेबरं भव नाशनं भवमव्ययम्
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥3॥
सरल हिंदी अर्थ:
जिनके चरण पुष्पों की सुगंध से सुशोभित हैं, जिनकी तीसरी आँख की अग्नि से कामदेव भस्म हो गए, जिनका शरीर भस्म से विभूषित है—मैं उन चन्द्रशेखर की शरण लेता हूँ।
भावार्थ:
यह श्लोक वैराग्य, तप और अहंकार के नाश का प्रतीक है।
🔱 श्लोक 4 Shri Chandrashekhar Ashtakam
मत्तवारणमुख्यचर्मकृतोत्तरीयमनोहरम्
पङ्कजासनपद्मलोचनपूजिताङ्घ्रिसरोरुहम् |
देवसिन्धुतरङ्गसीकरसिक्तशुभ्रजटाधरम्
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥4॥
सरल हिंदी अर्थ:
जो गजचर्म धारण करते हैं, जिनके चरणों की पूजा ब्रह्मा करते हैं, जिनकी जटाएँ गंगा जल से पवित्र हैं—उन चन्द्रशेखर की शरण में यम का भय नहीं।
भावार्थ:
यह श्लोक तपस्या, पवित्रता और वैदिक देवताओं की वंदना को दर्शाता है।
🔱 श्लोक 5 Shri Chandrashekhar Ashtakam
यक्षराजसखं भगाक्षहरं भुजङ्गविभूषणम्
शैलराजसुतापरिष्कृतचारुवामकलेबरम् |
क्ष्वेडनीलगलं परश्वधधारिणं मृगधारिणम्
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥5॥
सरल हिंदी अर्थ:
जो कुबेर के मित्र, नागों के आभूषण धारण करने वाले, पार्वती के साथ अर्धनारीश्वर स्वरूप में विराजमान, नीलकंठ हैं—मैं उनकी शरण लेता हूँ।
भावार्थ:
यह श्लोक शिव के करुणामय और संतुलित गृहस्थ-तपस्वी स्वरूप को दर्शाता है।
🔱 श्लोक 6 Shri Chandrashekhar Ashtakam
कुण्डलीकृतकुण्डलेश्वर कुण्डलं वृषवाहनम्
नारदादिमुनीश्वरस्तुतवैभवं भुवनेश्वरम् |
अन्धकान्तकमाश्रितामरपादपं शमनान्तकम्
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥6॥
सरल हिंदी अर्थ:
जिनके कानों में सर्प कुंडल हैं, जिनका वाहन नंदी है, जिन्हें नारदादि मुनि स्तुति करते हैं—उन चन्द्रशेखर की शरण में यम पराजित हैं।
🔱 श्लोक 7 Shri Chandrashekhar Ashtakam
भेषजं भवरोगिणामखिलापदामपहारिणम्
दक्षयज्ञविनाशनं त्रिगुणात्मकं त्रिविलोचनम् |
भुक्तिमुक्तिफलप्रदं सकलाघसंघनिबर्हणम्
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥7॥
सरल हिंदी अर्थ:
जो संसार रूपी रोग की औषधि हैं, सभी कष्टों के नाशक, तीन नेत्रों वाले, भोग और मोक्ष दोनों देने वाले हैं—मैं उनकी शरण लेता हूँ।
🔱 श्लोक 8 Shri Chandrashekhar Ashtakam
भक्तवत्सलमर्चितं निधिक्षयं हरिदंबरम्
सर्वभूतपतिं परात्परमप्रमेयमनुत्तमम् |
सोमवारिदभूहुताशनसोमपानिलखाकृतिम्
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥8॥
सरल हिंदी अर्थ:
जो भक्तों पर अत्यंत कृपालु, सर्वोच्च, अनुपम और सर्वभूतों के स्वामी हैं—उन चन्द्रशेखर की शरण में मृत्यु का भय नहीं।
🔱 श्लोक 9 Shri Chandrashekhar Ashtakam
विश्वसृष्टिविधायिनं पुनरेव पालनतत्परम्
संहरन्तमपि प्रपञ्चमशेषलोकनिवासिनम् |
कीडयन्तमहर्निशं गणनाथयूथसमन्वितम्
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः ॥9॥
सरल हिंदी अर्थ:
जो सृष्टि की रचना, पालन और संहार करने वाले हैं, जो गणों के साथ नित्य विहार करते हैं—उनकी शरण में यम का कोई अधिकार नहीं।
🔱 श्लोक 10 (फलश्रुति) Shri Chandrashekhar Ashtakam
मृत्युभीतमृकण्डुसूनुकृतस्तवं शिवसन्निधौ
यत्र कुत्र च यः पठेन्न हि तस्य मृत्युभयं भवेत् |
पूर्णमायुररोगतामखिलार्थसंपदमादरात्
चन्द्रशेखर एव तस्य ददाति मुक्तिमयत्नतः ॥10॥
सरल हिंदी अर्थ:
जो भी मृत्यु से भयभीत व्यक्ति मृकुंद के पुत्र द्वारा लिखी इस चन्द्रशेखर अष्टकम(Chandra Shekhar Ashtakam) को भगवान शिव के मंदिर में पढता है तो इसके माध्यम से उस व्यक्ति के मन से मृत्यु का भय खत्म हो जाता है| उस पूर्ण रूप से स्वस्थ जीवन की प्राप्ति होती है| जब कोई मुक्ति पाने का प्रयास करता है तो चंद्रमा के शिखर भगवान शिव उसे सम्पूर्ण जीवन धन तथा अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करते है|
सार
श्री चन्द्रशेखर अष्टकम न केवल एक स्तोत्र है, बल्कि यह भयमुक्त जीवन, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उत्थान का दिव्य मार्ग है। विशेष रूप से सोमवार के दिन इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है।
चन्द्रशेखर अष्टकम का महत्व (Importance)
- यह स्तोत्र कालांतक शिव की उपासना का सर्वोत्तम माध्यम है।
- नियमित पाठ से चंद्रमा की अशुभता कम होती है।
- सोमवार को जल, दूध, बेलपत्र अर्पित कर पाठ करने से शीघ्र फल मिलता है।
पौराणिक कथा (Chandrashekhar Ashtakam की उत्पत्ति से जुड़ी विस्तृत Mythology)
श्री चन्द्रशेखर अष्टकम के पीछे जुड़ी कथा केवल एक भक्त और भगवान की कहानी नहीं है, बल्कि यह भक्ति, नियति, कर्म और ईश्वर-कृपा के गहन दर्शन को प्रकट करती है। यह कथा महान शिवभक्त ऋषि मार्कंडेय से संबंधित है और इसी कारण यह स्तोत्र मृत्यु-भय से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है।
ऋषि मृकंडु की तपस्या और वरदान (Shri Chandrashekhar Ashtakam)
प्राचीन काल में एक महान तपस्वी ऋषि मृकंडु ऋषि अपनी पत्नी मरूदमती के साथ घोर तपस्या में लीन थे। वे संतानहीन थे और अपने वंश को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने भगवान शिव की कठोर उपासना की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर स्वयं भगवान शिव प्रकट हुए।
भगवान शिव ने उन्हें दो विकल्प दिए—
- अल्पायु लेकिन धर्मात्मा और ज्ञानी पुत्र,
- दीर्घायु लेकिन मूर्ख और अधर्मी पुत्र।
ऋषि मृकंडु ने बिना किसी संशय के पहले विकल्प को चुना, क्योंकि उनके लिए धर्म और भक्ति आयु से अधिक महत्वपूर्ण थे।
मार्कंडेय का जन्म और शिवभक्ति
कुछ समय पश्चात मरूदमती ने एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया, जिनका नाम मार्कंडेय रखा गया। बाल्यकाल से ही मार्कंडेय असाधारण थे। वे वेद, पुराण और शिव-तत्व में गहन रुचि रखते थे। जैसे-जैसे उनकी आयु बढ़ी, उनकी भक्ति और वैराग्य भी बढ़ता गया।
हालाँकि, एक कठोर सत्य उनके जीवन से जुड़ा था—उनकी आयु केवल 16 वर्ष निश्चित थी। इस तथ्य को जानते हुए भी मार्कंडेय ने कभी भय को अपने मन में स्थान नहीं दिया। उनके लिए शिव ही जीवन, शिव ही मृत्यु और शिव ही मोक्ष थे।
नियत समय और यमराज का आगमन
जब मार्कंडेय का सोलहवाँ वर्ष पूर्ण होने लगा, तब मृत्यु के देवता यमराज ने अपने दूतों को भेजा। किंतु मार्कंडेय की शिवभक्ति इतनी प्रबल थी कि यमदूत उन्हें स्पर्श तक न कर सके।
अंततः स्वयं यमराज को आना पड़ा। उस समय मार्कंडेय एक शिव मंदिर में शिवलिंग के समक्ष चन्द्रशेखर रूप का ध्यान करते हुए चन्द्रशेखर अष्टकम के भावों में लीन थे। उन्होंने भयभीत होने के स्थान पर शिवलिंग को दोनों भुजाओं से दृढ़ता से आलिंगन कर लिया।
शिव का प्राकट्य और कालांतक रूप
जब यमराज ने मार्कंडेय के गले में पाश डाला, तो वह पाश शिवलिंग के चारों ओर भी लिपट गया। यह दृश्य देखकर भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हुए। उसी क्षण शिवलिंग से स्वयं भगवान शिव प्रकट हुए।
उन्होंने अपने कालांतक रूप में यमराज पर प्रहार किया और उन्हें मृत्यु की स्थिति तक पहुँचा दिया। संपूर्ण देवगण स्तब्ध रह गए। तब यमराज ने शिव से क्षमा याचना की।
भगवान शिव ने यमराज को पुनः जीवनदान इस शर्त पर दिया कि—
“जो धर्मनिष्ठ, शिवभक्त और सच्चे साधक होंगे, उन पर मृत्यु का अधिकार नहीं चलेगा।”
इसी कारण भगवान शिव कालांतक, मृत्युंजय और चन्द्रशेखर कहलाए।
चन्द्रशेखर अष्टकम (Shri Chandrashekhar Ashtakam) की रचना
अपने आराध्य द्वारा जीवनदान प्राप्त कर ऋषि मार्कंडेय भावविभोर हो उठे। उसी क्षण उन्होंने भगवान शिव की स्तुति में श्री चन्द्रशेखर अष्टकम की रचना की। इस स्तोत्र का प्रत्येक श्लोक मृत्यु-भय से परे जाकर शिव की शरणागति को दर्शाता है।
विशेष रूप से बार-बार आने वाली पंक्ति—
“चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः”
इस कथा का सार है, जिसका अर्थ है—
“मैं चन्द्रशेखर भगवान की शरण में हूँ, फिर यम मेरा क्या कर सकते हैं?”
कथा का आध्यात्मिक संदेश Shri Chandrashekhar Ashtakam
इस पौराणिक कथा से हमें अनेक गूढ़ शिक्षाएँ मिलती हैं:
- सच्ची भक्ति भाग्य और मृत्यु से भी ऊपर होती है
- भय से नहीं, श्रद्धा से ईश्वर प्राप्त होते हैं
- शिव केवल संहारक नहीं, बल्कि करुणा और संरक्षण के प्रतीक हैं
- चन्द्रशेखर अष्टकम केवल पाठ नहीं, बल्कि आत्म-समर्पण है
चन्द्रशेखर अष्टकम की पौराणिक कथा यह सिखाती है कि जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा से भगवान शिव की शरण में जाता है, उसके जीवन से मृत्यु का भय, मानसिक अशांति और कर्मबंधन स्वयं नष्ट हो जाते हैं। यही कारण है कि इस स्तोत्र को मृत्यु-भय नाशक स्तोत्र भी कहा जाता है।
यह कथा आज भी शिवभक्तों को विश्वास, साहस और मोक्ष का मार्ग दिखाती है।
चन्द्रशेखर अष्टकम (Shri Chandrashekhar Ashtakam) पाठ के लाभ
- मानसिक शांति और भय से मुक्ति
- चंद्र दोष शांति
- दीर्घायु और स्वास्थ्य
- धन, समृद्धि और मोक्ष
चन्द्रशेखर अष्टकम पूजा की कीमत (Shri Chandrashekhar Ashtakam)
| पाठ संख्या | पंडितों की संख्या | अवधि | शुल्क (INR) |
|---|---|---|---|
| 551 पाठ | 5 पंडित | 1 दिन | ₹11,000 |
| 1,100 पाठ | 11 पंडित | 1 दिन | ₹21,000 |
| 2,100 पाठ | 21 पंडित | 1 दिन | ₹35,000 |
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External Reference:
👉 https://www.speakingtree.in (Sanatan Dharma & Shiva Stotra Reference)
Frequently Asked Questions Shri Chandrashekhar Ashtakam in Hindi
Q1. चन्द्रशेखर अष्टकम क्या है और इसका महत्व क्या है?
उत्तर: चन्द्रशेखर अष्टकम भगवान शिव को समर्पित एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसकी रचना ऋषि मार्कंडेय ने की थी। इसका नियमित पाठ मृत्यु-भय, मानसिक तनाव, चंद्र दोष और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।
Q2. चन्द्रशेखर अष्टकम किसने लिखा और क्यों लिखा?
उत्तर: चन्द्रशेखर अष्टकम की रचना ऋषि मार्कंडेय ने की थी। यह स्तोत्र उन्होंने तब गाया जब भगवान शिव ने उन्हें यमराज से रक्षा कर अमरत्व का आशीर्वाद दिया।
Q3. चन्द्रशेखर अष्टकम का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
उत्तर:
- सबसे शुभ दिन: सोमवार
- समय: प्रातः ब्रह्ममुहूर्त या संध्या
- विधि: शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र अर्पित कर शांत मन से 1, 3 या 11 बार पाठ करें।
Q4. क्या चन्द्रशेखर अष्टकम रोज पढ़ सकते हैं?
उत्तर: हाँ, इसका प्रतिदिन पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। नियमित पाठ से मानसिक शांति, आत्मबल और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
Q5. चन्द्रशेखर अष्टकम का पाठ करने से क्या लाभ मिलते हैं?
उत्तर:
- मृत्यु और रोग भय से मुक्ति
- चंद्र दोष और मानसिक तनाव में कमी
- दीर्घायु, स्वास्थ्य और सौभाग्य
- आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति
Q6. क्या चन्द्रशेखर अष्टकम चंद्र दोष के लिए प्रभावी है?
उत्तर: हाँ, यह स्तोत्र चंद्रमा से संबंधित मानसिक अस्थिरता, भय और भावनात्मक तनाव को शांत करने में विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है।
Q7. चन्द्रशेखर का अर्थ क्या होता है?
उत्तर: चन्द्रशेखर का अर्थ है—चंद्र (चंद्रमा) + शेखर (मुकुट), अर्थात जिनके मस्तक पर चंद्रमा विराजमान है, वे भगवान शिव चन्द्रशेखर कहलाते हैं।
Q8. भगवान शिव को कालांतक क्यों कहा जाता है?
उत्तर: जब भगवान शिव ने यमराज को पराजित कर मृत्यु का अंत किया, तब से उन्हें कालांतक (मृत्यु का नाश करने वाला) कहा जाने लगा।
Q9. चन्द्रशेखर अष्टकम का पाठ किसके लिए विशेष लाभकारी है?
उत्तर: यह स्तोत्र उन लोगों के लिए विशेष लाभकारी है जो मानसिक तनाव, भय, अस्थिरता, रोग, ग्रह दोष या आध्यात्मिक शांति की तलाश में हैं।
Q10. क्या चन्द्रशेखर अष्टकम से मोक्ष की प्राप्ति होती है?
उत्तर: शास्त्रों के अनुसार, श्रद्धा और भक्ति के साथ किए गए पाठ से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, जो अंततः मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।
Q11. क्या चन्द्रशेखर अष्टकम सुनने से भी लाभ होता है?
उत्तर: हाँ, श्रद्धापूर्वक श्रवण करने से भी सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और भय से राहत मिलती है।
Q12. What is the best time to chant Shri Chandrashekhar Ashtakam?
Answer:
The best time to chant Shri Chandrashekhar Ashtakam is early morning during Brahma Muhurta or in the evening after sunset. Chanting it on Mondays during Pradosh Kaal is considered highly auspicious.
Q13. How many times should Chandrashekhar Ashtakam be recited for best results?
Answer:
For general blessings, reciting it once daily is sufficient. For specific issues like fear, mental stress, or planetary imbalance, chanting it 11 or 21 times is recommended.
Q14. Can Chandrashekhar Ashtakam remove fear of death?
Answer:
Yes. Chandrashekhar Ashtakam is traditionally known as a fear-removal and death-protective stotra. It was composed by Rishi Markandeya himself after being saved from Yama by Lord Shiva.
Q15. Is Chandrashekhar Ashtakam suitable for beginners?
Answer:
Absolutely. Even beginners can chant Chandrashekhar Ashtakam. Listening to the stotra with devotion or reading it slowly with meaning also provides spiritual and mental benefits.
Q16. What is the difference between Chandrashekhar Ashtakam and Mahamrityunjaya Mantra?
Answer:
Chandrashekhar Ashtakam is a devotional stotra focusing oncknowledging Lord Shiva’s protective form, while Mahamrityunjaya Mantra is a Vedic mantra used mainly for health, longevity, and healing. Both complement each other spiritually.
Conclusion Shri Chandrashekhar Ashtakam in Hindi
श्री चन्द्रशेखर अष्टकम केवल एक स्तोत्र नहीं, बल्कि मृत्यु-भय, मानसिक अशांति और नकारात्मक कर्मों से मुक्ति का दिव्य मार्ग है। ऋषि मार्कंडेय की कथा इसे अत्यंत शक्तिशाली बनाती है। यदि आप सोमवार के दिन नियमित रूप से इसका पाठ करते हैं, तो यह आपके जीवन में शांति, स्थिरता, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति अवश्य लाएगा। यही कारण है कि चन्द्रशेखर अष्टकम को मृत्युंजय शिव स्तोत्र के समान प्रभावशाली माना जाता है।