आरती गजबदन विनायक की: संपूर्ण गणेश आरती, अर्थ, महत्व, पूजा विधि और पाठ
Aarti Gajavadan Vinayaka Ki:- आरती गजबदन विनायक की पूरी आरती पढ़ें। जानें गणेश आरती का सरल अर्थ, महत्व, पूजा विधि, सामग्री, गणेश मंत्र, FAQ और पंडित बुकिंग की जानकारी।
आरती गजबदन विनायक की भगवान श्री गणेश को समर्पित एक प्रसिद्ध और भक्तिमय गणेश आरती है। भगवान गणेश को हिंदू धर्म में शुभारंभ, बुद्धि, ज्ञान, विवेक और विघ्नों के निवारण का देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा, संस्कार या धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से करने की परंपरा है।
इस लेख में आपको आरती गजबदन विनायक की पूरी आरती, आरती का सरल हिंदी अर्थ, भगवान गणेश के स्वरूप का महत्व, गणेश आरती करने की विधि, पूजा में आवश्यक सामग्री, आरती के बाद की प्रार्थना, गणेश पूजा के लाभ और घर पर गणेश पूजा के लिए पंडित बुक करने की संपूर्ण जानकारी मिलेगी।
यदि आप घर, कार्यालय, दुकान या किसी शुभ अवसर पर विधि-विधान से गणेश पूजा करवाना चाहते हैं, तो Panditji on way के माध्यम से पूजा के लिए पंडित बुक करने की सुविधा उपलब्ध है।

आरती गजबदन विनायक की – संक्षिप्त जानकारी
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| आरती का नाम | आरती गजबदन विनायक की |
| आराध्य देव | भगवान श्री गणेश |
| अन्य नाम | गणपति, गणनायक, विनायक, गजानन, एकदंत, लंबोदर |
| प्रमुख भाव | भक्ति, बुद्धि, शुभता और विघ्न निवारण |
| पाठ का समय | गणेश पूजा के बाद या दैनिक आरती के समय |
| विशेष अवसर | गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी, विनायक चतुर्थी, शुभ कार्य |
| पूजा में प्रमुख अर्पण | दूर्वा, मोदक, पुष्प, फल, नैवेद्य |
| आरती का उद्देश्य | भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा और समर्पण |
| पूजा सेवा | घर, कार्यालय, प्रतिष्ठान एवं धार्मिक आयोजन |
॥ आरती गजबदन विनायक की ॥
आरती गजबदन विनायक की।
सुर-मुनि-पूजित गणनायक की॥
आरती गजबदन विनायक की।
सुर-मुनि-पूजित गणनायक की॥
आरती गजबदन विनायक की॥
एकदन्त शशिभाल गजानन,
विघ्नविनाशक शुभगुण कानन।
शिवसुत वन्द्यमान-चतुरानन,
दुःखविनाशक सुखदायक की॥
आरती गजबदन विनायक की॥
ऋद्धि-सिद्धि-स्वामी समर्थ अति,
विमल बुद्धि दाता सुविमल-मति।
अघ-वन-दहन अमल अबिगत गति,
विद्या-विनय-विभव-दायक की॥
आरती गजबदन विनायक की॥
पिङ्गलनयन, विशाल शुण्डधर,
धूम्रवर्ण शुचि वज्रांकुश-कर।
लम्बोदर बाधा-विपत्ति-हर,
सुर-वन्दित सब विधि लायक की॥
आरती गजबदन विनायक की॥
आरती गजबदन विनायक की का सरल हिंदी अर्थ
यह आरती भगवान गणेश के विभिन्न दिव्य स्वरूपों और उनके गुणों का वर्णन करती है। इसमें भगवान गणेश को देवताओं और ऋषि-मुनियों द्वारा पूजित गणनायक तथा विघ्नों का नाश करने वाला बताया गया है।
“एकदन्त शशिभाल गजानन” का अर्थ
भगवान गणेश को एकदंत कहा जाता है क्योंकि उनका एक दांत प्रमुख रूप से उनके स्वरूप की पहचान है। “शशिभाल” का संबंध चंद्रमा से और “गजानन” का अर्थ हाथी के समान मुख वाले भगवान से है।
वे भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं और भक्तों के दुखों को दूर करके सुख प्रदान करने वाले माने जाते हैं।
“विघ्नविनाशक” का अर्थ
भगवान गणेश का एक प्रमुख नाम विघ्नहर्ता है। धार्मिक परंपरा में उन्हें किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में सबसे पहले पूजने का विधान इसलिए माना जाता है ताकि कार्य निर्विघ्न रूप से संपन्न हो।
“ऋद्धि-सिद्धि-स्वामी” का अर्थ
इस पंक्ति में भगवान गणेश को ऋद्धि और सिद्धि के स्वामी के रूप में स्मरण किया गया है। ऋद्धि को समृद्धि और सिद्धि को सफलता एवं आध्यात्मिक उपलब्धि से जोड़ा जाता है।
“विमल बुद्धि दाता” का अर्थ
भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और ज्ञान प्रदान करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। इसलिए विद्यार्थी, व्यवसायी और नए कार्य की शुरुआत करने वाले लोग भी गणेश जी का पूजन करते हैं।
“लम्बोदर बाधा-विपत्ति-हर” का अर्थ
लंबोदर भगवान गणेश का एक प्रसिद्ध नाम है। इस चरण में उन्हें बाधाओं और विपत्तियों को दूर करने वाले देवता के रूप में प्रणाम किया गया है।
भगवान गणेश की आरती क्यों की जाती है?
हिंदू पूजा परंपरा में आरती भगवान के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और समर्पण व्यक्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। आरती में दीपक या ज्योति भगवान के सामने घुमाई जाती है और भक्त प्रार्थना करते हैं।
भगवान गणेश की आरती विशेष रूप से इन अवसरों पर की जाती है:
- गणेश चतुर्थी पूजा के बाद
- संकष्टी चतुर्थी के दिन
- दैनिक गणेश पूजा में
- नए व्यवसाय की शुरुआत पर
- गृह प्रवेश के अवसर पर
- विवाह एवं अन्य शुभ संस्कारों में
- परीक्षा या महत्वपूर्ण कार्य से पहले
- कार्यालय या प्रतिष्ठान की पूजा में
- किसी नए प्रोजेक्ट या कार्य की शुरुआत पर
- गणेश स्थापना एवं विसर्जन के अवसर पर
गणेश चतुर्थी के दौरान आरती और भजन पूजा का प्रमुख हिस्सा होते हैं। भारत सरकार के आधिकारिक पर्यटन पोर्टल Incredible India के अनुसार, गणेश चतुर्थी विशेष रूप से महाराष्ट्र में बड़े स्तर पर मनाई जाती है और इस दौरान घरों तथा सार्वजनिक पंडालों में गणेश पूजा एवं आरती की परंपरा है।
गणेश पूजा में आरती का सही क्रम
यदि आप घर पर भगवान गणेश की पूजा कर रहे हैं, तो सामान्य रूप से पूजा का क्रम इस प्रकार रखा जा सकता है:
| क्रम | पूजा प्रक्रिया |
|---|---|
| 1 | पूजा स्थान की सफाई |
| 2 | पूजा सामग्री तैयार करना |
| 3 | भगवान गणेश की स्थापना |
| 4 | संकल्प |
| 5 | गणेश आवाहन |
| 6 | आसन एवं पाद्य आदि उपचार |
| 7 | पुष्प एवं दूर्वा अर्पण |
| 8 | धूप और दीप |
| 9 | नैवेद्य एवं मोदक अर्पण |
| 10 | गणेश मंत्र एवं स्तोत्र पाठ |
| 11 | भगवान गणेश की आरती |
| 12 | पुष्पांजलि |
| 13 | क्षमा प्रार्थना |
| 14 | प्रसाद वितरण |
स्थानीय परंपरा, परिवार की परंपरा और पूजा के प्रकार के अनुसार विस्तृत विधि अलग हो सकती है। बड़े अनुष्ठान, गणेश स्थापना, प्राण-प्रतिष्ठा या गणपति होम में योग्य आचार्य या पंडित से विधि करवाना उचित रहता है।
गणेश आरती के लिए आवश्यक सामग्री
साधारण गणेश आरती के लिए बहुत अधिक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। पूजा के अनुसार सामग्री में परिवर्तन हो सकता है।
गणेश पूजा सामग्री सूची
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| भगवान गणेश की प्रतिमा | पूजन एवं ध्यान |
| दीपक | आरती |
| घी या तेल | दीप प्रज्वलन |
| कपूर | आरती |
| अगरबत्ती/धूप | धूप अर्पण |
| दूर्वा | गणेश पूजन में प्रमुख |
| लाल पुष्प | पुष्प अर्पण |
| रोली/कुमकुम | तिलक |
| अक्षत | पूजन |
| चंदन | तिलक एवं अर्पण |
| मोदक/लड्डू | नैवेद्य |
| फल | नैवेद्य |
| जल | आचमन एवं अर्पण |
| पंचामृत | अभिषेक, यदि पूजा में हो |
| कलश | विस्तृत पूजा में |
| नारियल | पूजा एवं संकल्प |
| सुपारी | पूजन सामग्री |
| पान | पारंपरिक पूजा में |
भगवान गणेश को दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती है?
गणेश पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व माना जाता है। सामान्यतः भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करते समय श्रद्धा और शुद्ध भावना का महत्व रखा जाता है।
दूर्वा अर्पित करते समय भक्त भगवान गणेश का ध्यान करके अपनी प्रार्थना और संकल्प प्रस्तुत कर सकते हैं।
पूजा की अलग-अलग परंपराओं में दूर्वा की संख्या और अर्पण की विधि अलग हो सकती है, इसलिए विशेष अनुष्ठान में अपने कुलाचार या पंडित द्वारा बताई गई विधि का पालन करना बेहतर है।
भगवान गणेश को मोदक क्यों प्रिय माना जाता है?
मोदक भगवान गणेश के सबसे प्रसिद्ध नैवेद्यों में से एक है। महाराष्ट्र सहित भारत के अनेक क्षेत्रों में गणेश चतुर्थी के दौरान मोदक विशेष रूप से बनाया और भगवान को अर्पित किया जाता है।
मोदक को ज्ञान, आनंद और आध्यात्मिक संतोष से भी प्रतीकात्मक रूप से जोड़ा जाता है।
गणेश चतुर्थी के अवसर पर उकडीचे मोदक, तले हुए मोदक तथा विभिन्न आधुनिक प्रकार के मोदक भी बनाए जाते हैं।
गणेश आरती करने का सही समय
भगवान गणेश की आरती के लिए कोई एक सार्वभौमिक समय सभी घरों के लिए अनिवार्य नहीं है। सामान्यतः आरती पूजा के समापन पर की जाती है।
गणेश पूजा के अवसर पर:
- प्रातःकाल पूजा के बाद आरती की जा सकती है।
- संध्याकालीन पूजा के बाद आरती की जा सकती है।
- गणेश चतुर्थी में स्थापना पूजा के बाद आरती की जाती है।
- घर की दैनिक पूजा में निर्धारित आरती के समय गणेश जी की आरती की जा सकती है।
यदि आप गणेश चतुर्थी की स्थापना, प्राण-प्रतिष्ठा या विशेष पूजा कर रहे हैं, तो उस वर्ष के पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त निर्धारित करना अधिक उचित है।
गणेश आरती के बाद कौन-से मंत्र पढ़ें?
आरती के बाद भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार गणेश मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
गणेश मूल मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः।
इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप भगवान गणेश के ध्यान और उपासना में किया जाता है।
इसके अतिरिक्त भक्त गणेश अथर्वशीर्ष, गणेश स्तोत्र, गणेश चालीसा अथवा भगवान गणेश के 108 नामों का पाठ भी कर सकते हैं।
गणेश आरती का धार्मिक महत्व
भगवान गणेश को विभिन्न नामों से पूजा जाता है, जिनमें प्रमुख हैं:
- गणपति
- गणेश
- विनायक
- गजानन
- एकदंत
- लंबोदर
- विघ्नहर्ता
- गणनायक
- सिद्धिविनायक
- मंगलमूर्ति
इन नामों के माध्यम से भगवान गणेश के अलग-अलग स्वरूपों और गुणों का स्मरण किया जाता है।
गणेश आरती का मुख्य भाव भगवान के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और समर्पण है।
गणेश पूजा के प्रमुख अवसर
भगवान गणेश की पूजा केवल गणेश चतुर्थी तक सीमित नहीं है। वर्षभर विभिन्न शुभ अवसरों पर गणेश पूजन किया जाता है।
प्रमुख अवसर
| अवसर | गणेश पूजा का उद्देश्य |
|---|---|
| गणेश चतुर्थी | गणेश जन्मोत्सव एवं विशेष पूजा |
| संकष्टी चतुर्थी | भगवान गणेश की उपासना |
| विवाह | शुभ कार्य की शुरुआत |
| गृह प्रवेश | नए घर में मंगल पूजा |
| व्यवसाय उद्घाटन | शुभारंभ |
| वाहन पूजा | नए वाहन का पूजन |
| कार्यालय उद्घाटन | व्यवसायिक शुभारंभ |
| परीक्षा/शिक्षा | बुद्धि एवं एकाग्रता के लिए प्रार्थना |
| जन्मदिन | मंगल एवं आशीर्वाद |
| धार्मिक अनुष्ठान | विघ्न निवारण हेतु गणेश पूजन |
गणेश चतुर्थी और गणेश आरती
गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित प्रमुख हिंदू पर्व है। Incredible India के अनुसार, यह उत्सव विशेष रूप से महाराष्ट्र में व्यापक रूप से मनाया जाता है और गणेश प्रतिमा की स्थापना, पूजा, आरती तथा अंत में विसर्जन इसकी प्रमुख परंपराओं में शामिल हैं।
2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को है। किसी विशेष शहर के लिए स्थापना या पूजा का मुहूर्त स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना चाहिए।
गणेश चतुर्थी के दौरान प्रचलित पूजा क्रम में गणेश स्थापना, पूजन, नैवेद्य, आरती, भजन और अंत में परंपरा के अनुसार विसर्जन शामिल हो सकता है।
घर पर गणेश पूजा कैसे करें?
यदि आप सामान्य घरेलू गणेश पूजा करना चाहते हैं, तो नीचे दिया गया सरल क्रम अपनाया जा सकता है।
चरण 1: पूजा स्थान की सफाई
सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करके भगवान गणेश की प्रतिमा को स्वच्छ चौकी पर स्थापित करें।
चरण 2: पूजा सामग्री रखें
दूर्वा, पुष्प, दीपक, धूप, चंदन, अक्षत, फल और नैवेद्य तैयार रखें।
चरण 3: संकल्प लें
अपने नाम, गोत्र और पूजा के उद्देश्य के अनुसार संकल्प लें। यदि गोत्र ज्ञात न हो तो योग्य पंडित से मार्गदर्शन लिया जा सकता है।
चरण 4: गणेश पूजन करें
भगवान गणेश को चंदन, अक्षत, पुष्प और दूर्वा अर्पित करें।
चरण 5: नैवेद्य अर्पित करें
मोदक, लड्डू, फल अथवा अपनी परंपरा के अनुसार सात्त्विक नैवेद्य अर्पित करें।
चरण 6: मंत्र एवं स्तोत्र का पाठ करें
“ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार गणेश स्तोत्र या अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
चरण 7: आरती करें
अंत में आरती गजबदन विनायक की श्रद्धापूर्वक गाएं।
चरण 8: प्रार्थना और प्रसाद
भगवान गणेश से परिवार की मंगलकामना करें और पूजा का प्रसाद सभी को वितरित करें।
क्या गणेश पूजा के लिए पंडित बुक करना आवश्यक है?
साधारण घरेलू पूजा और आरती भक्त स्वयं श्रद्धापूर्वक कर सकते हैं। लेकिन यदि आप गणेश स्थापना, प्राण-प्रतिष्ठा, गणपति होम, विस्तृत गणेश पूजा या विशेष संकल्प पूजा करवाना चाहते हैं, तो अनुभवी वैदिक पंडित की सहायता लेना उपयोगी हो सकता है।
पूजा की विधि, मंत्र, संकल्प और स्थानीय परंपरा के अनुसार आवश्यक अनुष्ठान में अंतर हो सकता है।
Panditji on way से गणेश पूजा के लिए पंडित कैसे बुक करें?
Panditji on way ऑनलाइन पूजा बुकिंग की सुविधा प्रदान करता है, जिसके माध्यम से भक्त अपने स्थान और पूजा की आवश्यकता के अनुसार पंडित बुक कर सकते हैं।
गणेश स्थापना एवं विसर्जन पूजा के लिए उपलब्ध सेवा में पूजा, गणपति होम, आवश्यक पूजा सामग्री और अनुकूलित पूजा व्यवस्था जैसे विकल्प दिए गए हैं। उपलब्ध पैकेज और कीमतें समय के साथ बदल सकती हैं, इसलिए बुकिंग से पहले वर्तमान विवरण देखना चाहिए।
गणेश पूजा बुकिंग प्रक्रिया
| चरण | क्या करना है |
|---|---|
| 1 | Panditji on way वेबसाइट पर जाएं |
| 2 | अपनी पूजा का प्रकार चुनें |
| 3 | तारीख और स्थान की जानकारी दें |
| 4 | आवश्यक पूजा पैकेज चुनें |
| 5 | पंडित एवं पूजा संबंधी आवश्यकताओं की पुष्टि करें |
| 6 | उपलब्ध भुगतान विकल्प से बुकिंग करें |
| 7 | पूजा के दिन निर्धारित समय पर पंडित से पूजा करवाएं |
गणेश स्थापना एवं विसर्जन पूजा की वर्तमान सेवा: Panditji on way पर उपलब्ध पैकेज में अलग-अलग विकल्प दिए गए हैं।
Panditji on way क्यों चुनें?
Panditji on way का उद्देश्य पारंपरिक पूजा सेवाओं को ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा के साथ उपलब्ध कराना है।
सेवा के अनुसार निम्न सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं:
- अनुभवी पंडितों की सेवा
- गणेश स्थापना पूजा
- गणपति होम
- गणेश विसर्जन पूजा
- पूजा सामग्री की व्यवस्था
- घर या निर्धारित स्थान पर पूजा
- अनुकूलित पूजा पैकेज
- ऑनलाइन बुकिंग सुविधा
महत्वपूर्ण: प्रत्येक पूजा की उपलब्धता, स्थान, कीमत और सामग्री पैकेज बुकिंग के समय वेबसाइट पर सत्यापित करें।
गणेश पूजा और आरती के लिए Panditji on way
यदि आप केवल आरती के बजाय संपूर्ण गणेश पूजा करवाना चाहते हैं, तो पहले अपनी आवश्यकता स्पष्ट करें—जैसे सामान्य गणेश पूजा, गणेश स्थापना, गणपति होम, गणेश चतुर्थी पूजा या विसर्जन पूजा।
इसके बाद तारीख, स्थान और पूजा की आवश्यकता के अनुसार उपलब्ध विकल्प चुनें।
आज ही अपनी गणेश पूजा की योजना बनाएं और पारंपरिक पूजा को सही विधि से करवाने के लिए योग्य पंडित की सेवा बुक करें।
- Incredible India / Ministry of Tourism — Ganesh Chaturthi की परंपरा, महाराष्ट्र में उत्सव और सांस्कृतिक महत्व के लिए। Ganesh Chaturthi – Incredible India
- Incredible India – Mumbai Ganesh Chaturthi — मुंबई के गणेशोत्सव और प्रमुख परंपराओं के लिए। Experiencing Ganesh Chaturthi in Mumbai – Incredible India
भारत सरकार की संस्कृति और विरासत संबंधी जानकारी के लिए: Ministry of Culture, Government of India
गणेश आरती से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न – FAQ
1. आरती गजबदन विनायक की क्या है?
आरती गजबदन विनायक की भगवान श्री गणेश को समर्पित एक भक्तिमय आरती है। इसमें भगवान गणेश के गजानन, एकदंत, लंबोदर, विघ्नविनाशक और ऋद्धि-सिद्धि के स्वामी जैसे स्वरूपों का स्मरण किया जाता है।
2. आरती गजबदन विनायक की कब पढ़नी चाहिए?
इसे गणेश पूजा के बाद, प्रातः या संध्याकालीन आरती के समय तथा गणेश चतुर्थी जैसे विशेष अवसरों पर श्रद्धापूर्वक पढ़ा जा सकता है।
3. क्या आरती गजबदन विनायक की गणेश चतुर्थी पर पढ़ सकते हैं?
हाँ। गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान गणेश की पूजा के बाद यह आरती गाई जा सकती है।
4. गणेश जी को सबसे पहले क्यों पूजा जाता है?
हिंदू धार्मिक परंपरा में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभारंभ के देवता के रूप में पूजा जाता है। इसलिए अनेक शुभ कार्यों की शुरुआत गणेश पूजन से की जाती है।
5. गणेश जी को कौन-सा प्रसाद चढ़ाना चाहिए?
मोदक और लड्डू भगवान गणेश को प्रमुख रूप से अर्पित किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त फल और परिवार की परंपरा के अनुसार सात्त्विक नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है।
6. गणेश जी को कौन-सी घास चढ़ाई जाती है?
भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा घास का विशेष महत्व माना जाता है।
7. गणेश जी का मंत्र कौन-सा है?
भगवान गणेश का प्रसिद्ध मंत्र है:
ॐ गं गणपतये नमः।
8. क्या महिलाएं गणेश जी की आरती कर सकती हैं?
हाँ। भगवान गणेश की आराधना और आरती श्रद्धा के साथ कोई भी भक्त अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार कर सकता है।
9. क्या गणेश आरती घर पर की जा सकती है?
हाँ। सामान्य गणेश पूजा और आरती घर पर श्रद्धापूर्वक की जा सकती है। विस्तृत अनुष्ठान के लिए योग्य पंडित से विधि समझना उपयोगी हो सकता है।
10. गणेश चतुर्थी 2026 कब है?
2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को है। पूजा और स्थापना का स्थानीय शुभ मुहूर्त शहर और पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है।
11. क्या गणेश स्थापना के लिए पंडित बुक कर सकते हैं?
हाँ। Panditji on way पर गणेश स्थापना एवं विसर्जन पूजा के लिए ऑनलाइन बुकिंग विकल्प उपलब्ध है।
12. गणेश पूजा के लिए पंडित कैसे बुक करें?
Panditji on way की वेबसाइट पर जाकर गणेश पूजा या गणेश स्थापना सेवा चुनें, उपलब्ध पैकेज देखें, तारीख और स्थान की जानकारी दें तथा बुकिंग प्रक्रिया पूरी करें।
निष्कर्ष
आरती गजबदन विनायक की भगवान गणेश की भक्ति, श्रद्धा और समर्पण से जुड़ी एक सुंदर आरती है। भगवान गणेश को शुभ कार्यों के आरंभ में पूजने की परंपरा भारतीय धार्मिक संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गणेश आरती के माध्यम से भक्त भगवान गणेश के विघ्नविनाशक, बुद्धिदाता, गजानन और मंगलकारी स्वरूप का स्मरण करते हैं। गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी, गृह पूजा, व्यवसाय प्रारंभ, गृह प्रवेश और अन्य शुभ अवसरों पर गणेश पूजन के साथ इस आरती का पाठ किया जा सकता है।
यदि आप घर या किसी विशेष स्थान पर गणेश स्थापना, गणेश पूजा, गणपति होम या विसर्जन पूजा विधि-विधान से करवाना चाहते हैं, तो Panditji on way के माध्यम से उपलब्ध पूजा सेवाओं और वर्तमान बुकिंग विकल्पों को देख सकते हैं।
श्री गणेशाय नमः।
गणपति बप्पा मोरया।
मंगलमूर्ति मोरया।
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